पटना | एशियन टाइम्स ब्यूरो
भूमि विवादों की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए आयुक्त ने कहा है कि अधिकांश मामलों की जड़ में कुछ राजस्व कर्मियों की लापरवाही, अनियमितता और गलत प्रविष्टियां होती हैं। उन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभव साझा करते हुए कहा कि समय पर और निष्पक्ष कार्रवाई हो तो आधे से अधिक भूमि विवाद स्वतः समाप्त हो सकते हैं।
आयुक्त ने कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में आम लोगों को सबसे अधिक परेशानी दाखिल-खारिज, जमाबंदी, सीमांकन और रिकॉर्ड में त्रुटियों के कारण होती है। कई बार वर्षों पुरानी गलतियां बाद में बड़े विवाद का रूप ले लेती हैं, जिससे आम नागरिकों को न्याय पाने के लिए कार्यालयों और अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना समय की आवश्यकता है। यदि राजस्व कर्मचारी और संबंधित अधिकारी अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करें तो भूमि विवादों की संख्या में भारी कमी लाई जा सकती है। बिहार सरकार भी भूमि सुधार, डिजिटल रिकॉर्ड और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। हाल के महीनों में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है।
आयुक्त ने यह भी कहा कि भूमि विवाद केवल कानूनी समस्या नहीं बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती है। इसके समाधान के लिए राजस्व विभाग, पुलिस प्रशासन और स्थानीय स्तर पर बेहतर समन्वय आवश्यक है। बिहार में भूमि विवादों के निपटारे के लिए पुलिस और राजस्व विभाग के बीच समन्वय को मजबूत करने की दिशा में भी पहल की गई है।
एशियन टाइम्स की राय
भूमि विवादों के मामलों में पारदर्शी व्यवस्था, समयबद्ध कार्रवाई और जवाबदेही तय किए बिना स्थायी समाधान संभव नहीं है। आम लोगों को राहत दिलाने के लिए राजस्व तंत्र में सुधार और भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।
Author: Noida Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)






