एशियन टाइम्स की खोजी टीम कर रही है जांच।
बने रहिए हमारे साथ, जल्द होगा बड़ा खुलासा।
पटना/विशेष रिपोर्ट
क्या पत्रकारिता और फोटोग्राफी की आड़ में प्रभावशाली लोगों तक पहुंच बनाने का खेल चल रहा है? क्या अधिकारियों, नेताओं और बिल्डरों से संपर्क कराने के नाम पर कुछ लोगों को गुमराह किया गया?
सच्चाई क्या है, आरोप कितने सही हैं और तथ्य क्या कहते हैं — एशियन टाइम्स की खोजी टीम कर रही है जांच।
हाल के वर्षों में सोशल मीडिया और यूट्यूब पत्रकारिता के बढ़ते प्रभाव के बीच यह बहस तेज हुई है कि क्या कुछ पत्रकार सत्ता, नेताओं या व्यावसायिक हितों के अधिक करीब हो गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट में भी यही आरोप लगाया गया है कि कई वरिष्ठ पत्रकार निष्पक्ष पत्रकारिता छोड़कर “दलाली” कर रहे हैं और जनता के मुद्दों से दूर हो गए हैं।
लेकिन इस सवाल का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्ता का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि तथ्यों को निष्पक्ष रूप से जनता तक पहुँचाना है। पत्रकार का काम सवाल पूछना, जांच करना और सच सामने लाना है। यदि कोई पत्रकार किसी सरकार की अच्छी योजना की सराहना करता है तो उसे दलाली नहीं कहा जा सकता, और यदि वह सरकार की आलोचना करता है तो उसे विरोधी भी नहीं कहा जाना चाहिए। असली कसौटी निष्पक्षता और तथ्य हैं।
यह भी सच है कि मीडिया पर राजनीतिक, कॉर्पोरेट और आर्थिक दबाव बढ़े हैं। कई वरिष्ठ पत्रकारों और मीडिया विशेषज्ञों ने भी इस चुनौती को स्वीकार किया है कि पत्रकारिता को स्वतंत्र और विश्वसनीय बनाए रखना पहले से अधिक कठिन हो गया है।
यूट्यूब पत्रकारिता ने आम लोगों को अपनी बात रखने का मंच दिया है। इससे कई महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए हैं जिन्हें मुख्यधारा मीडिया ने पर्याप्त महत्व नहीं दिया था। लेकिन दूसरी ओर, केवल सनसनी, क्लिक और व्यूज़ के लिए बनाई गई सामग्री भी बढ़ी है, जिससे पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी पत्रकार को केवल इसलिए “दलाल” कहना उचित नहीं है क्योंकि उसकी राय किसी व्यक्ति या सरकार से मेल खाती है। यदि किसी पत्रकार पर गंभीर आरोप हैं तो उन्हें तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर परखा जाना चाहिए। दूसरी ओर, पत्रकारों को भी आत्ममंथन करना होगा कि वे जनता के मुद्दों—बेरोजगारी, अपराध, शिक्षा, स्वास्थ्य और महिलाओं की सुरक्षा—पर लगातार और निर्भीकता से आवाज़ उठाएँ।
पत्रकारिता तभी जीवित रहेगी जब वह सत्ता, विपक्ष, कॉर्पोरेट और किसी भी प्रकार के दबाव से ऊपर उठकर जनता के प्रति जवाबदेह रहे। सभी पत्रकार एक जैसे नहीं होते। कुछ लोग पेशे की गरिमा बढ़ाते हैं, तो कुछ की वजह से पूरे पेशे पर सवाल उठते हैं।
सही पत्रकारिता न सत्ता की दलाली है, न विपक्ष की एजेंट। सही पत्रकारिता केवल सच, तथ्य और जनता के हित की पक्षधर होती है।
– तनवीर आलम शेख
Editor-in-Chief, Asian Times
Author: Noida Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)






