औरंगाबाद। बिहार की सत्तारूढ़ एनडीए सरकार के भीतर असंतोष की आवाजें एक बार फिर सामने आने लगी हैं। नवीनगर से जेडीयू विधायक चेतन आनंद ने बिहार मंत्रिमंडल में कई जिलों को प्रतिनिधित्व नहीं मिलने का मुद्दा उठाते हुए नाराजगी जाहिर की है। उनके बयान को सरकार और गठबंधन के भीतर बढ़ते असंतोष के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
औरंगाबाद में मीडिया से बातचीत के दौरान चेतन आनंद ने कहा कि सिर्फ औरंगाबाद ही नहीं, बल्कि बिहार के करीब 15 ऐसे जिले हैं, जहां से एक भी मंत्री नहीं बनाया गया है। उन्होंने कहा कि औरंगाबाद जिले से एनडीए के पांच विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे, लेकिन इसके बावजूद जिले को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
मंत्रिमंडल गठन को लेकर सवाल उठाते हुए जेडीयू विधायक ने कहा कि संभवतः इसमें जातीय समीकरण को प्राथमिकता दी गई होगी। उन्होंने कहा, “मंत्रिमंडल गठन में शायद जातीय समीकरण देखा गया होगा। हालांकि किस आधार पर मंत्री बनाए गए हैं, यह तो पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ही बेहतर जानता है। इस मुद्दे पर हम बोलने वाले कौन हैं, न हम तीन में हैं और न हम पांच में हैं।”

राजनीतिक जानकार चेतन आनंद के इस बयान को महज व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर मौजूद असंतोष की अभिव्यक्ति के रूप में देख रहे हैं। जेडीयू के एक विधायक द्वारा सार्वजनिक रूप से मंत्रिमंडल गठन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाना कई राजनीतिक संकेत दे रहा है।
गौरतलब है कि चेतन आनंद के पिता और पूर्व सांसद आनंद मोहन भी पिछले कुछ समय से अपनी ही पार्टी और सरकार की कार्यशैली को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने कई सार्वजनिक मंचों से आरोप लगाया था कि पार्टी और सरकार में योग्य कार्यकर्ताओं की बजाय “थैली देने वालों” को पद और महत्व दिया जा रहा है। उनके बयानों से बिहार की राजनीति में पहले भी हलचल मच चुकी है।
अब चेतन आनंद का क्षेत्रीय और जातीय प्रतिनिधित्व को लेकर दिया गया बयान उन चर्चाओं को फिर हवा दे रहा है कि एनडीए के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है।
@MUSKAN KUMARI





