पटना। पटना उच्च न्यायालय को नया नेतृत्व मिल गया है। वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय ने पटना हाईकोर्ट की 48वीं मुख्य न्यायाधीश के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राजधानी पटना स्थित लोक भवन में आयोजित समारोह में बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने उन्हें शपथ दिलाई। इस अवसर पर न्यायपालिका, प्रशासन और विधि जगत से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
शपथ ग्रहण के बाद पटना उच्च न्यायालय परिसर में उनके सम्मान में एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया, जहां न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।
न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय का जन्म 12 जुलाई 1964 को सिक्किम में हुआ था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित लेडी श्रीराम कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की डिग्री हासिल कर विधि के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की।

वर्ष 1990 में वह दिल्ली बार एसोसिएशन से जुड़ीं और दिल्ली उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस की। बाद में उन्होंने सिक्किम न्यायिक सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की और सिविल जज के रूप में न्यायिक सेवा में प्रवेश किया। विभिन्न न्यायिक पदों पर कार्य करते हुए उन्होंने एक अनुभवी और दक्ष न्यायाधीश के रूप में अपनी पहचान स्थापित की।
उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया भी हाल के दिनों में चर्चा में रही। 22 मई को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने केंद्र सरकार को उन्हें पटना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की थी। इसके बाद केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के साथ ही उनकी नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त हुआ।
हालांकि उनका कार्यकाल अपेक्षाकृत छोटा रहेगा। न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय 12 जुलाई को सेवानिवृत्त होने वाली हैं। ऐसे में मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल सीमित अवधि का होगा, लेकिन उनके लंबे न्यायिक और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए उनसे कई महत्वपूर्ण निर्णयों और न्यायिक सुधारों की अपेक्षा की जा रही है।
पटना हाईकोर्ट की नई मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनकी नियुक्ति को न्यायपालिका के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब विधि जगत की निगाहें उनके नेतृत्व और कार्यशैली पर टिकी हैं।
@MUSKAN KUMARI





