सहरसा मिड डे मील कांड पर हाईकोर्ट सख्त, फॉरेंसिक जांच में देरी पर जताई नाराजगी; आरएफएसएल निदेशक को तलब

पटना: सहरसा जिले के महिषी प्रखंड स्थित राजकीय मध्य विद्यालय, बलुआहा में मिड डे मील खाने के बाद 150 से अधिक छात्रों की तबीयत बिगड़ने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक बार फिर सुनवाई की। जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद की खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान लेकर मामले की सुनवाई करते हुए बिहार सरकार के निदेशक, एमडीएम/पीएम पोषण द्वारा दायर जवाब पर असंतोष जताया।

कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों और अधिकारियों से विचार-विमर्श कर नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही भागलपुर स्थित क्षेत्रीय फॉरेंसिक साइंस लैब (आरएफएसएल) के निदेशक को पक्षकार बनाने और अगली सुनवाई में ऑनलाइन उपस्थित होने का आदेश दिया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर नाराजगी व्यक्त की कि 189 स्कूली बच्चों की जान पर खतरा मंडराने के बावजूद आरएफएसएल, भागलपुर द्वारा खाद्य नमूनों की जांच नहीं की गई। कोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच रिपोर्ट में देरी चिंताजनक है।

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राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता अमीष कुमार ने आरएफएसएल निदेशक के लिए नोटिस स्वीकार करते हुए बताया कि 21 मई 2026 को इस संबंध में पत्र भेजा जा चुका था। वहीं, सहरसा के पुलिस अधीक्षक ने अदालत को बताया कि मामले के अनुसंधान पदाधिकारी (आईओ) ने खाद्य नमूनों को जांच के लिए भेजने में देरी की थी, जिसके कारण उन्हें निलंबित कर दिया गया है। कोर्ट ने इस संबंध में की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा अगली सुनवाई में पेश करने का निर्देश दिया।

अदालत को यह भी बताया गया कि महिषी प्रखंड के 68 स्कूलों में विद्यालय शिक्षा समिति के माध्यम से रसोई संचालित होती है, जबकि 58 विद्यालयों में एजेंसियों के जरिए मिड डे मील की व्यवस्था की जाती है। कोर्ट ने खाद्य आपूर्ति अधिकारी, खाद्य विश्लेषक अगमकुआं तथा भारतरत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर दलित उत्थान एवं शिक्षा समिति को भी पक्षकार बनाने का निर्देश दिया।

जिलाधिकारी, सहरसा ने अदालत को बताया कि घटना के बाद 189 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिन्हें उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। राज्य में कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों के लिए कुल 68,795 स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना संचालित की जा रही है।

गौरतलब है कि बलुआहा स्थित विद्यालय में मिड डे मील खाने के बाद डेढ़ सौ से अधिक बच्चों ने पेट दर्द, उल्टी और चक्कर आने की शिकायत की थी। स्थानीय लोगों ने आशंका जताई थी कि भोजन में सांप का बच्चा या कोई जहरीला कीड़ा गिर गया था। इसके बाद प्रशासन ने खाद्य नमूनों को जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा था। साथ ही संबंधित प्रधानाध्यापक को निलंबित कर एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी।

मामले की अगली सुनवाई 18 जून 2026 को होगी।

@MUSKAN KUMARI

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Author: NCRLOCALDESK

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