पटना। बिहार में हर वर्ष आने वाली बाढ़ की चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सरकार ने अपनी रणनीति को और मजबूत तथा हाईटेक बनाने का फैसला किया है। नेपाल से आने वाले पानी और वहां होने वाली भारी बारिश के कारण अचानक उत्पन्न होने वाली बाढ़ की आशंका को कम करने के लिए अब नई व्यवस्था लागू की गई है, जिसे आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
अब तक बिहार को नेपाल में वर्षा और नदी जलस्तर की जानकारी 24 घंटे में केवल एक बार मिलती थी, जिससे कोसी, गंडक और अन्य सीमावर्ती नदियों में जलस्तर बढ़ने की सूचना देर से पहुंचती थी। इसके कारण प्रशासन को तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता था और कई बार निचले इलाकों में पानी पहुंचने के बाद ही चेतावनी जारी हो पाती थी।
इसी समस्या के समाधान के लिए 30 अप्रैल और 1 मई को आयोजित भारत-नेपाल संयुक्त समिति की 11वीं बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। बैठक में सहमति बनी कि अब नेपाल अपने रेन गेज स्टेशनों से हर घंटे वर्षा संबंधी आंकड़े साझा करेगा। यह जानकारी केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के माध्यम से सीधे बिहार के जल संसाधन विभाग तक पहुंचाई जाएगी।
नई व्यवस्था के तहत बिहार सरकार बाढ़ की आशंका का 72 घंटे पहले अधिक सटीक पूर्वानुमान जारी कर सकेगी। इससे जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और राहत एजेंसियों को समय रहते आवश्यक तैयारियां करने का अवसर मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि रियल टाइम मॉनिटरिंग की यह व्यवस्था बाढ़ प्रबंधन के पूरे मॉडल को बदल सकती है।

इधर, बाढ़ से निपटने की तैयारियों के बीच पटना जिला प्रशासन ने नाव दुर्घटनाओं को रोकने के लिए भी सख्त कदम उठाए हैं। जिला पदाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने सभी सरकारी और निजी नावों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। साथ ही सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले नावों के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। ओवरलोडिंग करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने बाढ़ तैयारियों की समीक्षा की है। जल संसाधन विभाग का कंट्रोल रूम एक जून से चौबीसों घंटे सक्रिय है और नदियों के जलस्तर की जानकारी लगातार संबंधित जिलों तथा आपदा प्रबंधन विभाग को भेजी जा रही है।
उत्तर बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पंचायत स्तर तक तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। सीओ, बीडीओ, एनडीआरएफ की टीमें, स्वयंसेवक और जनप्रतिनिधि मिलकर तटबंधों का निरीक्षण कर रहे हैं। साथ ही लोगों को बाढ़ के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों और सुरक्षित रहने के उपायों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल से मिलने वाला प्रति घंटे का डेटा और 72 घंटे पहले की चेतावनी प्रणाली बिहार में बाढ़ प्रबंधन के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। इससे न केवल राहत और बचाव कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि जान-माल के नुकसान को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
@MUSKAN KUMARI






