डेथ एनिवर्सरी स्पेशल: कॉलेज पार्टी से स्टारडम तक, ऐसे चमके विनोद खन्ना
गोरी रंगत, लंबा कद और गहरी आंखें—सिर्फ 18 साल की उम्र में ही विनोद खन्ना का व्यक्तित्व इतना आकर्षक था कि कॉलेज में लड़कियां उनके लुक की तारीफ करते नहीं थकती थीं। अक्सर दोस्त उन्हें सलाह देते—“हीरो जैसे लगते हो, फिल्मों में जाओ।”
लेकिन घर की सोच अलग थी। उनके पिता चाहते थे कि विनोद अपनी पढ़ाई पूरी कर खानदानी टेक्सटाइल बिजनेस संभालें। यहीं से उनके भीतर बागी रवैया पनपने लगा। पिता के कहने पर कॉमर्स लेने के बजाय उन्होंने साइंस चुना—जो उनके स्वतंत्र फैसलों की शुरुआत थी।
कहानी में बड़ा मोड़ तब आया जब एक कॉलेज पार्टी में फिल्मी दुनिया की मशहूर हस्तियां पहुंचीं। उस दौर के सुपरस्टार सुनील दत्त और उनकी करीबी अंजू महेंद्रू भी वहां मौजूद थीं। वे यह देखने आए थे कि युवा किस तरह पार्टी करते हैं।
हर बार की तरह इस बार भी विनोद अपनी पर्सनैलिटी से सबका ध्यान खींचने में कामयाब रहे। सुनील दत्त की नजरें बार-बार उन पर टिक गईं। उस समय दत्त अपने भाई सोम दत्त को लॉन्च करने की तैयारी कर रहे थे।
अगले ही दिन उन्होंने विनोद को अपने ऑफिस बुलाया और फिल्म का ऑफर दे दिया। जहां कोई भी इस मौके पर खुश होता, वहीं विनोद के मन में डर था—उन्हें पता था कि पिता इस फैसले के लिए राजी नहीं होंगे।
शाम को घर पहुंचकर उन्होंने हिम्मत जुटाई और पिता से कहा—
“मुझे फिल्म में काम मिला है।”
पिता का गुस्सा इतना बढ़ा कि उन्होंने बंदूक तक तान दी और कहा—
“अगर फिल्मों में गए तो गोली मार दूंगा।”
मां के समझाने के बाद आखिरकार पिता मान गए, लेकिन शर्त रखी—
“2 साल में कुछ कर दिखाओ, वरना बिजनेस संभालना होगा।”
यहीं से 1968 में उनका फिल्मी सफर शुरू हुआ, जो 27 अप्रैल 2017 को उनके निधन तक जारी रहा।
करियर और स्टारडम का सफर
विनोद खन्ना की पहली फिल्म मन का मीत (1968) फ्लॉप रही, लेकिन इसी के बाद उनके लिए बड़े मौके खुल गए।
- राजेश खन्ना के साथ सच्चा झूठा, आन मिलो सजना
- मनोज कुमार के साथ पूरब पश्चिम
तीनों फिल्में सुपरहिट रहीं और विनोद खन्ना स्टार बन गए।
इसके बाद बतौर लीड हीरो मेरे अपने, मेरा गांव मेरा देश, दो यार, हाथ की सफाई, इम्तिहान जैसी फिल्मों ने उन्हें इंडस्ट्री के टॉप एक्टर्स में शामिल कर दिया।
किस्सा-1: जब अमिताभ बच्चन ने फेंका ग्लास
अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना की राइवलरी काफी चर्चित रही। एक फिल्म की शूटिंग के दौरान एक सीन में अमिताभ को गुस्से में ग्लास फेंकना था।
सीन इतना रियल हो गया कि ग्लास सच में विनोद खन्ना को लग गया और उन्हें टांके तक लगाने पड़े।
हालांकि, इस घटना के बावजूद दोनों के बीच प्रोफेशनल रिश्ते मजबूत रहे और उन्होंने कई हिट फिल्मों में साथ काम किया।
Author: Noida Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)







