पटना | Asian Times Desk
बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी मोड़ आने की संभावना दिखाई दे रही है। चर्चा तेज हो गई है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल्द ही मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जा सकते हैं। इस संभावित फैसले को लेकर बुधवार शाम पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास पर लगभग 6 घंटे तक अहम बैठक चली।
बैठक में जदयू के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से संजय झा और विजय चौधरी शामिल थे। हालांकि बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए विजय चौधरी ने कहा कि अंतिम फैसला खुद नीतीश कुमार को ही लेना है।
JDU का बयान: नीतीश ही हैं सर्वस्वीकार्य नेता
बैठक के बीच जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा कर कहा कि:
“नीतीश कुमार बिहार के सर्वस्वीकार्य नेता हैं। उनकी लोकप्रियता हर क्षेत्र में दिखाई देती है। जनता का स्नेह और समर्थन ही उनकी असली पहचान है।”
इस बयान के बाद भी राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जारी है कि पार्टी के अंदर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर गंभीर मंथन चल रहा है।
निशांत कुमार की एंट्री की चर्चा तेज
इन चर्चाओं के बीच एक और नाम तेजी से उभरकर सामने आ रहा है—निशांत कुमार, जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे हैं।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी के अंदर यह भी चर्चा चल रही है कि अगर नीतीश कुमार दिल्ली की राजनीति में जाते हैं तो निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में लाया जा सकता है।
हालांकि जदयू ने अभी तक इन चर्चाओं का आधिकारिक तौर पर न तो समर्थन किया है और न ही खंडन।
रामनाथ ठाकुर का राज्यसभा जाना लगभग तय
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर का राज्यसभा जाना लगभग तय माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि उन्होंने नामांकन से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं।
इसी बीच जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा भी दिल्ली से पटना पहुंच गए, जिससे सियासी हलचल और तेज हो गई है।
बिहार की राजनीति में बन रही हैं तीन संभावित स्थितियां
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक मौजूदा हालात में तीन प्रमुख संभावनाएं बन रही हैं।
1. नीतीश कुमार राज्यसभा जाएं
इस स्थिति में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जा सकते हैं।
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उनके बेटे निशांत कुमार को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है।
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वहीं बीजेपी मुख्यमंत्री पद पर दावा ठोक सकती है।
2. निशांत कुमार को राज्यसभा भेजा जाए
दूसरी संभावना यह है कि
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निशांत कुमार को राज्यसभा भेजकर उनकी औपचारिक राजनीतिक एंट्री कराई जाए।
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इससे भविष्य में जदयू के नेतृत्व को लेकर रास्ता साफ हो सकता है।
3. दूसरे नाम पर सहमति नहीं
तीसरी स्थिति यह भी हो सकती है कि
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रामनाथ ठाकुर के अलावा दूसरे नाम पर सहमति नहीं बन पा रही हो
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इसलिए कई तरह के नाम राजनीतिक चर्चाओं में सामने आ रहे हों।
चिराग पासवान ने अटकलों को किया खारिज
मुख्यमंत्री बदलने की चर्चाओं पर चिराग पासवान ने स्पष्ट कहा कि ऐसी कोई स्थिति नहीं है।
उन्होंने कहा:
“ऐसी कोई चर्चा नहीं है कि बिहार में मुख्यमंत्री बदले जाएंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अनुभवी नेतृत्व में हमारी सरकार चल रही है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की डबल इंजन सरकार इसी तरह काम करती रहेगी।”
चिराग पासवान ने दावा किया कि 200 से अधिक सीटों के समर्थन के साथ एनडीए सरकार मजबूत स्थिति में है।
राजद का आरोप: ‘ऑपरेशन लोटस’
वहीं विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने इस पूरे मामले को लेकर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
राजद प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि:
भाजपा ने साइलेंट ऑपरेशन लोटस चलाकर नीतीश कुमार को घेर लिया है और उन्हें राज्यसभा भेजने की तैयारी की जा रही है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि:
मुख्यमंत्री को डराकर और दबाव बनाकर यह फैसला कराया जा रहा है, ताकि बाद में कहा जा सके कि उन्होंने स्वेच्छा से पद छोड़ा।
राजद ने इसे “बिहार के इतिहास का सबसे शर्मनाक राजनीतिक अपहरण” बताया।
अगर निशांत राजनीति में आते हैं तो क्या होगा?
अगर निशांत कुमार को राज्यसभा भेजा जाता है तो इसके दो बड़े राजनीतिक मायने निकल सकते हैं।
1. नीतीश कुमार की राजनीतिक रिटायरमेंट की तैयारी
नीतीश कुमार अब 76 वर्ष के हो चुके हैं और पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की भी चर्चा होती रही है।
अगर निशांत कुमार राजनीति में आते हैं तो इसे इस रूप में देखा जा सकता है कि
नीतीश कुमार धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति से दूरी बना सकते हैं।
हालांकि नीतीश कुमार हमेशा परिवारवाद के खिलाफ राजनीति करते रहे हैं और उन्होंने कई बार लालू-राबड़ी परिवार पर इसी मुद्दे को लेकर हमला किया है।
2. JDU का भविष्य सुरक्षित करना
निशांत कुमार की एंट्री का दूसरा बड़ा मतलब यह भी हो सकता है कि
नीतीश कुमार के बाद भी जदयू का राजनीतिक भविष्य सुरक्षित रहे।
फिलहाल पार्टी में नीतीश कुमार के अलावा कोई ऐसा नेता नहीं है जो पूरे संगठन और वोट बैंक को एकजुट रख सके।
नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में
ललन सिंह /संजय झा /विजय चौधरी /अशोक चौधरी
शामिल हैं, लेकिन इनमें से कोई भी नेता कुर्मी-कोईरी और EBC वोट बैंक के समीकरण पर पूरी तरह फिट नहीं बैठता।
बिहार की राजनीति में तीसरी धुरी
पिछले तीन दशकों की बिहार राजनीति पर नजर डालें तो यहां हमेशा एक तीसरी राजनीतिक धुरी मौजूद रही है, जिसका नेतृत्व अक्सर नीतीश कुमार ने किया है।
करीब 16 प्रतिशत से अधिक वोट बैंक लगातार नीतीश कुमार के साथ बना रहा है।
वर्तमान में
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जदयू के पास 85 विधायक
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और 12 सांसद हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर नीतीश कुमार के बाद जदयू कमजोर होती है तो इसका फायदा प्रशांत किशोर जैसे नए राजनीतिक खिलाड़ियों को मिल सकता है।
अमित शाह का सीमांचल दौरा भी चर्चा में
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का सीमांचल दौरा भी बिहार की राजनीति में संभावित बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर नीतीश कुमार भविष्य में पद छोड़ते हैं तो बिहार में बीजेपी अपना मुख्यमंत्री बना सकती है।
फिलहाल बिहार की राजनीति में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। मुख्यमंत्री आवास पर हुई लंबी बैठक और नेताओं के बयान यह जरूर संकेत दे रहे हैं कि जदयू के अंदर नेतृत्व और भविष्य को लेकर गंभीर मंथन चल रहा है।
अब सबकी नजर नीतीश कुमार के अंतिम फैसले पर टिकी है, क्योंकि बिहार की राजनीति की दिशा काफी हद तक इसी निर्णय से तय होगी।
Author: Noida Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)







