बेऊर सेंट्रल जेल में बंद राजद के पूर्व विधायक रीतलाल यादव को एक बार फिर कानूनी झटका लगा है। पटना हाई कोर्ट ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है।
जस्टिस सत्यव्रत वर्मा की एकल पीठ ने खगौल थाना कांड संख्या 171/2025 में गुरुवार को यह आदेश पारित किया। अदालत ने मामले की गंभीरता, आरोपों की प्रकृति और लंबित आपराधिक मामलों को ध्यान में रखते हुए राहत देने से इनकार किया।
50 लाख रंगदारी केस में गिरफ्तारी
पूर्व विधायक ने 17 अप्रैल 2025 को दानापुर कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था। उन पर बिल्डर कुमार गौरव से 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप है।
इस मामले में 10 अप्रैल 2025 को खगौल थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बाद 11 अप्रैल को पटना पुलिस ने रीतलाल यादव के 11 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
पुलिस के अनुसार छापेमारी में:
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10.5 लाख रुपये नकद
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77 लाख रुपये के ब्लैंक चेक
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चार पेन ड्राइव
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जमीन से जुड़े कई संदिग्ध दस्तावेज
बरामद किए गए।
सरेंडर के बाद अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया, और तब से वे बेऊर जेल में बंद हैं।
90 के दशक से आपराधिक पृष्ठभूमि का आरोप
पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक रीतलाल यादव का जन्म 16 जनवरी 1972 को दानापुर के कोथावां गांव में हुआ। 1990 के दशक में उन पर साइकिल-मोटरसाइकिल चोरी और राहगीरों से छिनतई जैसे आरोप लगे।
जैसे-जैसे दानापुर और आसपास के इलाकों में जमीन की खरीद-फरोख्त बढ़ी, उन पर जमीन मालिकों और बिल्डरों से रंगदारी मांगने के आरोप सामने आने लगे। पुलिस का दावा है कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले कथित तौर पर रकम देने का दबाव बनाया जाता था।
जमीन कब्जा और अवैध निर्माण का मामला
जांच के दौरान मुस्तफापुर मौजा में 76 डिसमिल जमीन पर 16 दुकानों का निर्माण कर किराये पर देने का मामला सामने आया। प्रशासन ने 15 मई 2025 को उक्त जमीन को कब्जामुक्त कराया।
इसके अलावा, कोथावां मौजा में लगभग तीन एकड़ गैर-मजरुआ सरकारी जमीन पर चहारदीवारी कर अवैध कब्जे का आरोप भी लगाया गया है। जांच टीम ने अंचल कार्यालय से दस्तावेज जुटाकर कई संपत्तियों की जांच की है।
संगठित सिंडिकेट चलाने का आरोप, ईडी की एंट्री
पटना पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि रीतलाल यादव दानापुर क्षेत्र में एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट संचालित करते थे, जो जमीन कब्जा, रंगदारी और धमकी के जरिए वसूली करता था।
मामले की जांच रिपोर्ट प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सौंप दी गई है। सूत्रों के अनुसार अवैध रूप से अर्जित संपत्ति और धन के प्रवाह की जांच की तैयारी चल रही है।
पुलिस ने रीतलाल यादव और उनके सहयोगियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कथित तौर पर अवैध रूप से अर्जित धन का इस्तेमाल युवाओं को गिरोह से जोड़ने में किया गया।
अदालत में क्या हुआ?
बचाव पक्ष की ओर से वरीय अधिवक्ता राजेंद्र नारायण ने जमानत की पैरवी की, जबकि राज्य की ओर से अधिवक्ता अजय मिश्रा ने विरोध किया।
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि रीतलाल यादव के खिलाफ लगभग 40 आपराधिक मामले लंबित हैं। अदालत ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों को देखते हुए नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी।
आगे क्या?
अब पूर्व विधायक के पास उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का विकल्प बचा है। वहीं, ED की संभावित कार्रवाई और पुलिस की आगे की जांच पर सबकी नजर टिकी है।
दानापुर और आसपास के इलाके में इस फैसले के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
Author: Noida Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)






