“IGIMS परीक्षा विवाद: पेपर लीक के आरोपों से मचा हड़कंप, जांच कमेटी गठित”

पटना,

पटना के प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में एमबीबीएस और पीजी फाइनल ईयर परीक्षाओं को लेकर उठा विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। कथित प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों ने न सिर्फ छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ाई है, बल्कि पूरे मेडिकल शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए संस्थान ने शैक्षणिक संकाय के अध्यक्ष डॉ. ओम कुमार की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी पेपर सेटिंग, सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षा संचालन समेत सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है।

संस्थान के उप निदेशक विभूति प्रसन्न सिन्हा ने कहा कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है और जल्द ही रिपोर्ट निदेशक को सौंपी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी पाई गई, तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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सूत्रों के अनुसार, 11 मार्च 2026 को एक छात्र द्वारा संस्थान के निदेशक डॉ. बिन्दे को भेजे गए गुमनाम ईमेल में डीन (परीक्षा) कार्यालय के कर्मी हेमंत पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। आरोप है कि पैसे लेकर चुनिंदा छात्रों को पहले से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया जाता था और उत्तर पुस्तिकाओं में भी हेरफेर की जाती थी।

मामले के बाद 17 मार्च को निदेशक कक्ष में उच्चस्तरीय बैठक हुई, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने से विवाद और गहरा गया। इसके बाद तत्कालीन डीन (परीक्षा) प्रकाश दुबे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई। 2 अप्रैल को डॉ. नीरू गोयल को नई जिम्मेदारी सौंपी गई।

7 अप्रैल को हुई एक अन्य बैठक में निदेशक की गैरहाजिरी ने सवालों को और बढ़ा दिया। इस बीच, यह भी सामने आया है कि निदेशक डॉ. बिन्दे पहले से ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की जांच के दायरे में हैं, जहां उन पर फर्जी प्रमाणपत्र से जुड़े आरोप लगे हैं।

विवाद को लेकर सियासी और सामाजिक हलकों में भी प्रतिक्रिया तेज हो गई है। छात्र और अभिभावक पारदर्शी एवं निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। कई अभिभावकों ने सरकार से हस्तक्षेप की अपील भी की है।
छात्रों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो उनके करियर पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे में यह मामला अब सिर्फ एक संस्थान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बिहार की मेडिकल शिक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल बनकर उभर रहा है—क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या यह मुद्दा भी सियासी शोर में दब जाएगा?

@MUSKAN KUMARI

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Author: NCRLOCALDESK

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