संसद का मॉनसून सत्र गुरुवार को विपक्ष के लगातार हंगामे और सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच जारी गतिरोध के बीच समाप्त हो गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की। सत्र के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी सदन में मौजूद रहे।
20 जुलाई से शुरू हुआ मॉनसून सत्र निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 13 अगस्त तक चलना था। हालांकि, पूरे सत्र के दौरान कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन सकी। विपक्ष ने छात्रों के प्रदर्शन, जंतर-मंतर पर कथित पुलिस कार्रवाई, राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी और NEET-UG में कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा।
विपक्षी दलों ने NEET विवाद पर तत्काल चर्चा और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही चलने देने की अपील की।
लगातार नारेबाजी और हंगामे के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित हुई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, लोकसभा में निर्धारित कामकाज का करीब 16 प्रतिशत और राज्यसभा में लगभग 31 प्रतिशत ही हो सका।
हालांकि, गतिरोध के बीच सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने में सफल रही। इनमें एंटी-पेपर लीक बिल, टैक्सेशन संशोधन बिल, सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा विधेयक, MSME संशोधन बिल और ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल शामिल हैं।
वहीं, FCRA संशोधन बिल और परिसीमन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण विधेयक इस सत्र में लंबित रह गए। इस तरह मॉनसून सत्र कानून निर्माण के साथ-साथ सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे राजनीतिक टकराव के लिए भी चर्चा में रहा।
@MUSKAN KUMARI






