पटना: बिहार की सत्ता राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस बार चर्चा के केंद्र में बिहार विधान परिषद के सभापति का अहम पद है, जिसे लेकर एनडीए खेमे में अंदरखाने मंथन शुरू हो गया है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि इस बार यह प्रतिष्ठित पद जदयू के खाते में जा सकता है, जिससे गठबंधन के भीतर नए शक्ति-संतुलन के संकेत मिल रहे हैं।
दरअसल, पूर्व सभापति Devesh Chandra Thakur ने लोकसभा चुनाव 2024 में सीतामढ़ी से सांसद चुने जाने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। वे 25 अगस्त 2022 को विधान परिषद के सभापति बने थे। उनके इस्तीफे के बाद यह जिम्मेदारी Awadhesh Narayan Singh को सौंपी गई, जिन्होंने निर्विरोध रूप से पदभार संभाला।
अब राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पिछली बार भाजपा के पास रहा यह पद इस बार जदयू को दिया जा सकता है। माना जा रहा है कि एनडीए के भीतर जातीय और राजनीतिक संतुलन साधने की रणनीति के तहत ऐसा फैसला लिया जा सकता है। हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में भी सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन की झलक साफ दिखाई दी थी।

सूत्रों के मुताबिक, Nitish Kumar की पार्टी जदयू इस पद को लेकर सक्रिय हो गई है और वरिष्ठ नेताओं के नामों पर गंभीर मंथन चल रहा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि विधान परिषद सभापति का पद संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
हालांकि, अभी तक एनडीए या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सत्ता के गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज है। माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब गठबंधन के भीतर बड़े संवैधानिक और संगठनात्मक पदों के बंटवारे की प्रक्रिया भी गति पकड़ रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह केवल एक पद का बदलाव नहीं, बल्कि एनडीए के भीतर नई रणनीतिक और राजनीतिक प्राथमिकताओं का संकेत हो सकता है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अंतिम फैसला जदयू के पक्ष में जाता है या भाजपा एक बार फिर इस अहम पद पर अपनी पकड़ बनाए रखती है।.
@MUSKAN KUMARI







