रिश्वतखोरी के मामले में तत्कालीन PF पदाधिकारी को 5 साल की सजा, विशेष निगरानी अदालत का फैसला

मुजफ्फरपुर: सीतामढ़ी के तत्कालीन जिला भविष्य निधि (पीएफ) पदाधिकारी प्रदीप कुमार को भ्रष्टाचार के मामले में विशेष निगरानी न्यायालय, मुजफ्फरपुर ने दोषी करार देते हुए 3 एवं 5 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश दशरथ मिश्र ने 5 अगस्त 2026 को सुनाया।

मामला वर्ष 2014 का है। निगरानी थाना कांड संख्या-97/2014 (विशेष वाद संख्या-77/2014) के अनुसार, प्रदीप कुमार पर परिवादी खुबीलाल कुमार से भविष्य निधि से जुड़े कार्य का निष्पादन और भुगतान योग्य कमीशन चालू कराने के बदले 20 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप था। शिकायत के सत्यापन के बाद 9 दिसंबर 2014 को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने उन्हें 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।

मामले की जांच तत्कालीन पुलिस निरीक्षक मुशरी प्रसाद ने की और समय पर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 12 गवाहों की गवाही कराई। विशेष लोक अभियोजक कृष्ण देव शाह की प्रभावी पैरवी के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया।

Ad.
Ad.

अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(डी) के तहत 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड का आदेश दिया। जुर्माना जमा नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक भ्रष्टाचार के 13 मामलों में अदालतें दोषियों को सजा सुना चुकी हैं। ब्यूरो ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

@MUSKAN KUMARI

NCRLOCALDESK
Author: NCRLOCALDESK

Share this post:

खबरें और भी हैं...

लाइव क्रिकट स्कोर
[the_ad_group id="65"]
मौसम अपडेट
राशिफल