बिहार: कथित फर्जी IAS मनीष के ठिकाने पर हुई छापेमारी के बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। तलाशी के दौरान 31 लीटर विदेशी शराब, बारहसिंगा के दो सींग और एक कछुआ बरामद होने की बात सामने आई है। अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बारहसिंगा के सींग वहां कैसे पहुंचे और उनका इस्तेमाल किस मकसद से किया जाता था।
मनीष के बचपन के एक क्लासमेट के मुताबिक, उसका जन्म 1975 में हुआ था। शुरुआती पढ़ाई जमालपुर-गोगरी इलाके के सरकारी स्कूल में हुई। बताया जाता है कि उसने 1991 की मैट्रिक परीक्षा में टॉप किया था। पढ़ाई में तेज मनीष ने इंटर तक स्थानीय स्तर पर पढ़ाई की, जिसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए अपने बड़े भाई के पास दिल्ली चला गया। दिल्ली जाने के बाद पुराने दोस्तों से उसका संपर्क धीरे-धीरे कम होता गया।
करीब 41 साल की उम्र में अविवाहित मनीष ने लगभग पांच कट्ठे की कोठी को अपना ठिकाना बना लिया था। बताया जाता है कि वह बाहरी लोगों को घर के भीतर आसानी से प्रवेश नहीं देता था और पुराने साथियों से भी दूरी बनाए रखता था। उसकी कोठी में स्वीमिंग पूल होने और उसमें कछुआ पाले जाने की बात भी सामने आई है। कछुए को लेकर घर में धन बढ़ने की मान्यता होने की बात कही जा रही है।

छापेमारी में मिले सरकारी बोर्ड, फर्जी आई-कार्ड, विदेशी शराब, बैंकिंग दस्तावेज और डिजिटल उपकरण ने जांच एजेंसियों के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति से जुड़ा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी संपत्ति आखिर कैसे जुटाई गई। क्या यह सिर्फ फर्जी अफसरी और रुतबे का मामला था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क, आर्थिक लेनदेन और प्रभावशाली लोगों का कनेक्शन भी था?
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। छापेमारी में मिले दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की जांच के बाद ही इस कथित फर्जी IAS की पूरी कहानी और संपत्ति के स्रोत का खुलासा होने की उम्मीद है।
@MUSKAN KUMARI





