पटना: बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर बना संवैधानिक संकट आखिरकार खत्म हो गया है। राज्यपाल द्वारा उन्हें बिहार विधान परिषद (एमएलसी) का सदस्य मनोनीत किए जाने के बाद उनके मंत्री पद को लेकर चल रही राजनीतिक और कानूनी अटकलों पर विराम लग गया है। राजभवन की ओर से जारी अधिसूचना के बाद दीपक प्रकाश अब विधान परिषद के सदस्य के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे।
दरअसल, मंत्री बनने के बाद छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना संवैधानिक रूप से अनिवार्य होता है। समयसीमा समाप्त होने के करीब पहुंचने पर विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा था। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने भी दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर बने रहने की वैधता को लेकर राज्य सरकार से जवाब तलब किया था, जिससे मामला और गंभीर हो गया।

संवैधानिक संकट से उबरने के लिए विधान परिषद सदस्य देवेश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद राज्य मंत्रिपरिषद की अनुशंसा पर राज्यपाल ने रिक्त हुई सीट पर दीपक प्रकाश को विधान परिषद का सदस्य मनोनीत कर दिया।
इस फैसले के बाद मंत्री पद की पात्रता को लेकर उठ रहे सभी राजनीतिक और कानूनी सवाल समाप्त हो गए हैं। हालांकि, देवेश कुमार के शेष कार्यकाल के अनुसार दीपक प्रकाश का एमएलसी कार्यकाल मार्च 2027 तक ही रहेगा।
@MUSKAN KUMARI






