ट्रैफिक चालान विवादों पर सख्त पटना हाईकोर्ट, लोक अदालत मॉडल लागू करने के निर्देश

राज्य में ट्रैफिक चालान से जुड़े विवादों के निपटारे को लेकर पटना हाईकोर्ट ने अहम रुख अपनाया है। अदालत ने इन मामलों को लोक अदालत में नहीं ले जाने पर नाराज़गी जताते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह ओडिशा की तर्ज पर एक अधिसूचना जारी करे।

चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने रानी तिवारी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई तक सरकार यह स्पष्ट करे कि ट्रैफिक चालान विवादों का निपटारा किस अधिकारी द्वारा किया जाएगा और किस न्यूनतम राशि तक के मामलों को इस प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल 2026 को तय की गई है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि अन्य राज्यों की तरह बिहार में ट्रैफिक चालान विवादों के समाधान के लिए लोक अदालत का उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा है। इससे पहले अदालत ने राज्य सरकार और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (बालसा) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विकास कुमार पंकज ने अदालत को बताया कि महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और चंडीगढ़ समेत कई राज्यों में ट्रैफिक चालान से जुड़े विवादों का निपटारा लोक अदालत और विशेष लोक अदालतों के माध्यम से किया जाता है, जिससे लोगों को त्वरित न्याय मिलता है।

कोर्ट ने कहा कि सामान्य अदालतों पर बढ़ते बोझ को कम करने के लिए लोक अदालतों का गठन किया गया है। यदि ट्रैफिक चालान जैसे मामलों को वहां भेजा जाए, तो न सिर्फ मामलों का जल्द निपटारा होगा, बल्कि अदालतों का समय भी बचेगा।

अधिवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि बिहार में चालान काटने की प्रक्रिया में मनमानी होती है और विवादों के समाधान के लिए कोई प्रभावी तंत्र नहीं है। कई मामलों में लंबित चालान के कारण लोगों को प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) तक नहीं मिल पाता, जिससे आम नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ती है।

कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि अन्य राज्यों की तरह बिहार में भी लोक अदालतों के जरिए ऐसे मामलों का समाधान शुरू किया जाता है, तो इससे आम लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है और न्याय प्रक्रिया अधिक सरल व सुलभ हो सकेगी।

@MUSKAN KUMARI

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Author: NCRLOCALDESK

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