नई दिल्ली,
भारत के रक्षा मंत्री मंगलवार से तीन दिवसीय दौरे पर जा रहे हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करना है। इस दौरान एक महत्वपूर्ण डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।
दौरे के दौरान बर्लिन में राजनाथ सिंह अपने जर्मन समकक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ विस्तृत बातचीत करेंगे। इन बैठकों में रक्षा उद्योग में साझेदारी बढ़ाने, सेना-सेना के संबंधों को मजबूत करने और नई तकनीकों—जैसे साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन—के क्षेत्र में सहयोग पर विशेष जोर रहेगा।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग से जुड़े रोडमैप और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों के लिए प्रशिक्षण सहयोग से संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।
पनडुब्बी सौदे पर भी नजर
यह दौरा इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि भारत और जर्मनी के बीच छह अत्याधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के बड़े सौदे पर मुहर लग सकती है। यह प्रोजेक्ट भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।
‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बढ़ावा
इस यात्रा के दौरान रक्षा मंत्री जर्मनी की प्रमुख रक्षा कंपनियों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। इसका उद्देश्य ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत भारत में संयुक्त उत्पादन और अत्याधुनिक तकनीकों के हस्तांतरण को बढ़ावा देना है।
गौरतलब है कि पिछले लगभग सात वर्षों में किसी भारतीय रक्षा मंत्री की यह पहली जर्मनी यात्रा है। इससे पहले 2019 में तत्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने जर्मनी का दौरा किया था। इस दौरे से भारत और जर्मनी के बीच रणनीतिक और रक्षा साझेदारी को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
@MUSKAN KUMARI






