नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण लगाने के लिए सरकार ने 1 नवंबर 2026 से वाहनों के प्रवेश को लेकर सख्ती शुरू कर दी है। नए नियमों के तहत दिल्ली के बाहर पंजीकृत BS-VI से कम उत्सर्जन मानक वाले पेट्रोल और डीजल वाहनों की एंट्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके चलते दिल्ली-एनसीआर के कई बॉर्डर पर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं और लोगों को भारी ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ रहा है।
दिल्ली-एनसीआर के बॉर्डर पर सख्त चेकिंग
दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाहनों की पुलिस और परिवहन विभाग की टीमें जांच कर रही हैं। BS-VI मानक पूरे नहीं करने वाले प्रतिबंधित वाहनों को वापस लौटाया जा रहा है।
दिल्ली-गुरुग्राम, दिल्ली-नोएडा, दिल्ली-गाजियाबाद और दिल्ली-सोनीपत बॉर्डर पर चेकिंग के कारण यातायात प्रभावित हुआ है। दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर पर NH-48 पर कई किलोमीटर तक वाहनों की कतारें देखी गईं।
609 वाहनों को बॉर्डर से लौटाया गया
3 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 1 नवंबर से 2 नवंबर के बीच विशेष जांच अभियान के दौरान बड़ी कार्रवाई की। अधिकारियों के मुताबिक, 7,657 वाहनों की जांच की गई और 609 गैर-अनुपालन वाले वाहनों को वापस भेजा गया।
BS-VI पेट्रोल और डीजल वाहन प्रवेश कर सकते हैं।
इलेक्ट्रिक वाहनों को छूट है।
CNG वाहनों को लागू शर्तों के तहत अनुमति है।
प्रतिबंधित श्रेणी के बाहरी राज्यों में पंजीकृत वाहनों को प्रवेश नहीं मिलेगा।
वैध PUC प्रमाणपत्र रखना भी जरूरी है।
यह प्रतिबंध 31 जनवरी 2027 तक लागू रखने की घोषणा की गई है।
प्रदूषण रोकने की कोशिश या आम लोगों की नई परेशानी?
सरकार का उद्देश्य वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करना है, लेकिन अचानक लागू हुई सख्ती से रोजाना दिल्ली आने-जाने वाले नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और यात्रियों की मुश्किलें बढ़ी हैं।
खासकर दिल्ली-एनसीआर में काम करने वाले उन लोगों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है, जिनके पास पुराने मानक वाले वाहन हैं।
अब देखना होगा कि प्रदूषण नियंत्रण के इन उपायों से दिल्ली की हवा कितनी साफ होती है और आम लोगों को ट्रैफिक जाम से कब राहत मिलती है।
Author: Noida Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)






