पटना/नई दिल्ली | Asian Times
बिहार की राजनीति में मोकामा के विधायक अनंत सिंह को लेकर घमासान जारी है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) से छह साल के लिए निष्कासन और विधानसभा की सदस्यता समाप्त करने की मांग के बीच दिल्ली में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और जदयू के वरिष्ठ नेता संजय झा से सवाल पूछे गए। हालांकि, दोनों नेताओं की ओर से इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब नहीं मिलने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
पत्रकारों के सवाल पर क्या हुआ?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जब पत्रकारों ने ललन सिंह से अनंत सिंह पर पार्टी की कार्रवाई और उनकी विधायकी को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने सीधे जवाब देने के बजाय कहा कि संजय झा से बात कीजिए। इसके बाद संजय झा से भी इस मामले पर प्रतिक्रिया मांगी गई, लेकिन उन्होंने भी विस्तार से कुछ नहीं कहा।
दोनों नेताओं की इस प्रतिक्रिया ने बिहार की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, उनकी चुप्पी को किसी खास राजनीतिक रणनीति या मतभेद का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
आखिर अनंत सिंह पर जदयू ने कार्रवाई क्यों की?
विवाद की मुख्य वजह बिहार विधान परिषद के शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों का चुनाव है। पटना स्नातक सीट पर जदयू ने नीरज कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया था, जबकि अनंत सिंह ने जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन किया था।
पार्टी ने इसे पार्टी-विरोधी गतिविधि माना। इसके बाद 24 अक्टूबर 2026 को जदयू ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित करने की घोषणा की। पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष से अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त करने की कार्रवाई करने का अनुरोध भी किया।
क्या अनंत सिंह की विधायकी खत्म हो जाएगी?
यह इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम सवाल है। जदयू की ओर से सदस्यता समाप्त करने की मांग किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि अनंत सिंह की विधायकी स्वतः समाप्त हो गई है। इस संबंध में संविधान और लागू नियमों के तहत प्रक्रिया पूरी करनी होगी तथा संबंधित प्राधिकारी को निर्णय लेना होगा।
इसलिए फिलहाल उनकी विधानसभा सदस्यता को समाप्त मानना सही नहीं होगा। आगे की कार्रवाई और विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय पर सबकी नजर रहेगी।
दुलारचंद यादव हत्याकांड भी चर्चा में
अनंत सिंह का नाम 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मोकामा क्षेत्र में हुई दुलारचंद यादव की हत्या के मामले में भी सामने आया था। इस मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। मार्च 2026 में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आए थे। उनकी जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने की खबरें भी सामने आई हैं।
यह मामला और जदयू से निष्कासन का घटनाक्रम अलग-अलग कानूनी एवं राजनीतिक प्रक्रियाएं हैं।
बिहार की राजनीति में आगे क्या होगा?
अनंत सिंह के निष्कासन के बाद अब तीन सवाल महत्वपूर्ण हो गए हैं—क्या उनकी विधानसभा सदस्यता पर कोई कार्रवाई होगी, क्या वह भविष्य में अपनी अलग राजनीतिक रणनीति अपनाएंगे और इस घटनाक्रम का मोकामा की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
फिलहाल जदयू का फैसला सामने आ चुका है। अब आगे की कानूनी प्रक्रिया और संबंधित नेताओं के बयानों से तस्वीर और स्पष्ट होगी।
Asian Times अनंत सिंह प्रकरण अब केवल पार्टी के अंदरूनी विवाद तक सीमित नहीं है। इसमें उनकी विधायकी, जदयू के संगठनात्मक फैसले और बिहार की बदलती राजनीतिक समीकरणों से जुड़े सवाल भी शामिल हैं।
Author: Noida Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)






