नेहा बोरा के बॉन्ड नोटिस पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी, शाम 6 बजे फैसले का इंतजार
नई दिल्ली | Asian Times
दिल्ली हाई कोर्ट में AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत जारी ₹10,000 के बॉन्ड और शांति बनाए रखने संबंधी नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर गुरुवार को सुनवाई पूरी हो गई। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार शाम 6 बजे फैसले की उम्मीद जताई गई थी।
क्या है पूरा मामला?
नेहा बोरा ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की ओर से जारी नोटिस को चुनौती दी है। यह नोटिस BNSS की धारा 126 और 130 के तहत जारी किया गया था, जिसमें उनसे शांति बनाए रखने के लिए ₹10,000 का बॉन्ड भरने को कहा गया।
नेहा बोरा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायण ने अदालत में दलील दी कि उनकी मुवक्किल ने जंतर-मंतर को डीनोटिफाई किए जाने के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया था। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट में कहीं भी हिंसा भड़काने या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की अपील नहीं की गई थी।
प्रदर्शन के कुछ ही मिनटों में हिरासत में लेने का आरोप
याचिकाकर्ता के वकील के अनुसार, 16 अक्टूबर को मंडी हाउस इलाके में पहुंचने के कुछ ही मिनटों के भीतर नेहा बोरा को हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने इस कार्रवाई को गैर-कानूनी बताते हुए सवाल उठाया कि जब कोई अपराध नहीं किया गया, तो इस तरह की कार्रवाई किस आधार पर की गई।
मजिस्ट्रेट की स्वतंत्र जांच पर हाई कोर्ट का सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर सवाल उठाया कि BNSS के तहत बॉन्ड का नोटिस जारी करने से पहले क्या मजिस्ट्रेट ने संबंधित तथ्यों की स्वतंत्र रूप से जांच की थी।
अदालत ने उदाहरण के जरिए यह जानना चाहा कि क्या केवल किसी व्यक्ति के खिलाफ मिली सूचना के आधार पर नोटिस जारी करना पर्याप्त है, या मजिस्ट्रेट को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि सूचना सही और विश्वसनीय है।
यह सवाल मामले का महत्वपूर्ण पहलू बनकर सामने आया।
दिल्ली पुलिस ने क्या दलील दी?
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने याचिका की सुनवाई-योग्यता पर सवाल उठाए। उन्होंने दलील दी कि शांति भंग होने की आशंका के मामलों में कार्रवाई के लिए किसी पारंपरिक आपराधिक घटना का होना अनिवार्य नहीं है।
ASG ने दावा किया कि नेहा बोरा की गतिविधियों के संबंध में 12 बार नियमों के उल्लंघन की स्थिति सामने आई। उन्होंने जनरल डायरी की प्रविष्टियों, पूर्व FIR और मौके की परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी करने से पहले उपलब्ध जानकारी पर विचार किया था।
सत्ता परिवर्तन की मांग पर भी बहस
सुनवाई के दौरान सत्ता परिवर्तन से संबंधित बयान का भी जिक्र हुआ। नेहा बोरा के वकील ने दलील दी कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन की मांग करना अपने आप में गलत नहीं है।
वहीं, दिल्ली पुलिस की ओर से कहा गया कि सत्ता परिवर्तन लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मतदान के जरिए होना चाहिए। पुलिस ने अपनी दलील में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।
अब फैसले पर नजर
इस मामले में एक ओर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन और नागरिक अधिकारों से जुड़े सवाल उठाए गए, तो दूसरी ओर पुलिस ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी का हवाला दिया।
महत्वपूर्ण: उपलब्ध रिपोर्ट में गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को शाम 6 बजे फैसले की उम्मीद बताई गई है, लेकिन फैसले का वास्तविक परिणाम इस सामग्री से पुष्ट नहीं होता। इसलिए अंतिम आदेश की पुष्टि के बाद ही यह बताया जा सकता है कि हाई कोर्ट ने नेहा बोरा को राहत दी या याचिका पर क्या निर्णय सुनाया।
Asian Times | खबर वही, जो तथ्यों के साथ।
Author: Noida Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)






