दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों पर कार्रवाई के आरोप, महिलाओं और बच्चों पर हमले का दावा

नई दिल्ली | Asian Times

लोकतंत्र में पत्रकार का काम सवाल पूछना और जनता की आवाज को सामने लाना है। लेकिन जब किसी प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों को ही अपनी जिम्मेदारी निभाने से रोका जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है।

दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान कुछ पत्रकारों के साथ कथित बदसलूकी और पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। घटनास्थल पर मौजूद लोगों का दावा है कि महिला पत्रकारों और सरकार से सवाल पूछने वाले लोगों को वहां से हटाया जा रहा था। वहीं, कुछ लोगों पर महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ लाठी-डंडों से मारपीट करने का आरोप भी लगाया गया है।

सबसे बड़ा सवाल उस समय उठा, जब कुछ लोगों ने एक गाड़ी को रोककर पुलिस से उसकी जांच करने की मांग की। उनका आरोप था कि गाड़ी में कुछ ऐसे लोग मौजूद हैं, जिनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए। लेकिन उनके मुताबिक, गाड़ी को रोककर जांच करने के बजाय वहां से जाने दिया गया।

अगर ऐसा हुआ है, तो सवाल यह है कि पुलिस ने गाड़ी की जांच क्यों नहीं की? क्या इस मामले में कोई कार्रवाई हुई? इन सवालों का जवाब पुलिस को देना चाहिए।

इसी दौरान एक पत्रकार ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनसे आईडी कार्ड मांगा और रिपोर्टिंग करने से रोक दिया। पत्रकार का दावा है कि बाद में उन्हें पकड़कर पुलिस की गाड़ी में बैठा लिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी उन्हें जेल भेजने की बात कह रहे थे।

बताया जा रहा है कि पुलिस की गाड़ी में बैठाए जाने के बाद पत्रकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारे लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया।

प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों की धार्मिक पहचान और कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर भी विवाद सामने आया। हालांकि, इस पूरे मामले की निष्पक्ष तस्वीर सामने लाने के लिए घटना का पूरा वीडियो और सभी संबंधित पक्षों के बयान देखना जरूरी है।

लेकिन यहां सबसे अहम सवाल पत्रकारिता की आजादी का है।

पत्रकार सरकार से सवाल पूछे, पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए या प्रदर्शन में हो रही घटनाओं को कैमरे में रिकॉर्ड करे—यह उसका काम है। अगर किसी पत्रकार ने कानून तोड़ा है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन सिर्फ सवाल पूछने या रिपोर्टिंग करने के कारण किसी पत्रकार को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

पुलिस की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। ऐसे में यह भी जरूरी है कि महिलाओं और बच्चों पर मारपीट के आरोपों की जांच हो और पत्रकार को हिरासत में लेने के कारण स्पष्ट किए जाएं।

आखिर सवाल पूछना गुनाह कब से हो गया? और अगर पत्रकार ही घटनास्थल पर सच्चाई दिखाने से डरने लगे, तो आम जनता की आवाज कौन उठाएगा?

Asian Times इस मामले में पुलिस का पक्ष और घटना से जुड़े सत्यापित तथ्य सामने आने पर खबर को अपडेट करेगा।

Noida Desk
Author: Noida Desk

मुख्य संपादक (Editor in Chief)

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