पटना/फुलवारी शरीफ: फुलवारी शरीफ थाना क्षेत्र से महिला के
लापता होने के मामले में अब पुलिस की कार्रवाई को लेकर नया सवाल खड़ा हुआ है। महिला के परिजन की शिकायत पर पहले Asian Times ने खबर प्रकाशित की थी। खबर प्रकाशित होने के बाद पीड़ित परिवार की ओर से संपर्क कर मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चिंता जताई गई।
परिजन के अनुसार, पुलिस की ओर से यह जानकारी दी गई कि महिला की संभावित लोकेशन की जानकारी मिली है और उसे तलाशने के लिए पुलिस टीम को मौके पर जाना है। हालांकि, परिवार की ओर से यह सवाल उठाया गया कि यदि लोकेशन उपलब्ध है तो पुलिस महिला को बरामद करने के लिए तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है।
पत्रकार ने पुलिस अधिकारी से क्या पूछा?
मामले को लेकर Asian Times की ओर से एक महिला पुलिस अधिकारी से बातचीत की गई। बातचीत के दौरान यह सवाल रखा गया कि अगर किसी गरीब परिवार के पास निजी वाहन या महंगी गाड़ी उपलब्ध नहीं है, तो क्या पुलिस टीम को मौके तक पहुंचाने की जिम्मेदारी परिवार की होगी?
पत्रकार के अनुसार, बातचीत में पुलिस की ओर से थाने में वाहन और ड्राइवर उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी संबंधित पुलिस अधिकारियों से नहीं हो सकी है।
DGP कंट्रोल रूम से भी किया संपर्क
मामले की गंभीरता को देखते हुए Asian Times की ओर से बिहार पुलिस के DGP कंट्रोल रूम से भी संपर्क किया गया। वहां से कथित तौर पर संबंधित जिम्मेदार पुलिस अधिकारी से संपर्क करने की सलाह दी गई।
इसके बाद पटना SSP, सिटी SP सेंट्रल और DSP फुलवारी से संपर्क करने की कोशिश किए जाने का दावा किया गया। पत्रकार के अनुसार, कई बार फोन करने के बावजूद कॉल रिसीव नहीं हुआ और वापस भी कोई कॉल नहीं आया।
बिहार पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर पुलिस का 112 आपातकालीन नंबर, महिला हेल्पलाइन और Missing Persons सेवा उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। वेबसाइट पर पुलिस की ओर से नागरिकों को शिकायत एवं लापता व्यक्तियों से संबंधित सेवाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। 
बड़ा सवाल—गरीब परिवार पुलिस तक कैसे पहुंचे?
इस पूरे घटनाक्रम ने एक अहम सवाल खड़ा किया है—अगर किसी लापता व्यक्ति की संभावित लोकेशन पुलिस तक पहुंचती है, तो उसे बरामद करने की जिम्मेदारी किसकी है?
क्या किसी गरीब परिवार से यह अपेक्षा की जा सकती है कि वह पुलिस टीम को घटनास्थल तक पहुंचाने के लिए अपना वाहन उपलब्ध कराए? या फिर पुलिस के पास ऐसी परिस्थितियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए?
यह सवाल केवल इस एक परिवार का नहीं, बल्कि उन तमाम गरीब परिवारों से जुड़ा है जो किसी संकट की स्थिति में पुलिस व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं।
पुलिस का पक्ष आना बाकी
इस मामले में संबंधित थाना, वरीय पुलिस अधिकारियों और DGP कार्यालय का आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि महिला की लोकेशन वास्तव में पुलिस को प्राप्त हुई थी या नहीं और उस लोकेशन के आधार पर पुलिस ने क्या कार्रवाई की।
Asian Times ने संबंधित पक्षों से संपर्क करने का प्रयास किया है। पुलिस का आधिकारिक जवाब मिलने के बाद उसे भी खबर में शामिल किया जाएगा।
Asian Times का सवाल:
“अगर लोकेशन पुलिस के पास है, तो लापता महिला की बरामदगी में वाहन और ड्राइवर की कमी कितनी बड़ी बाधा है? और अगर गरीब परिवार के पास वाहन नहीं है, तो क्या उसकी मदद के लिए पुलिस की अपनी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए?”
नोट: इस खबर में पुलिस की कार्यप्रणाली से संबंधित बातें पत्रकार/परिजन द्वारा बताए गए घटनाक्रम के आधार पर हैं। पुलिस की ओर से स्वतंत्र पुष्टि मिलने तक इन्हें आरोप या दावा के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
Author: Noida Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)






