लखीसराय: बिहार के स्वास्थ्य विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि सरकारी अस्पतालों में पत्रकारों को रिपोर्टिंग करने की पूरी स्वतंत्रता है और मीडिया कवरेज पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई जानी चाहिए। लेकिन लखीसराय जिले के बड़हिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में जारी एक आदेश ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सत्येंद्र नारायण मोहन पासवान के हस्ताक्षर से अस्पताल परिसर में चस्पा सूचना में कहा गया है कि प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की अनुमति के बिना अस्पताल परिसर में वीडियोग्राफी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इस आदेश के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या किसी अधिकारी को स्वास्थ्य मंत्री के स्पष्ट निर्देशों के विपरीत ऐसा आदेश जारी करने का अधिकार है?
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कुछ दिन पहले ही लखीसराय के जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार ने बड़हिया CHC का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण में करोड़ों रुपये की लागत से बना नया अस्पताल भवन बंद मिला, जबकि सेवाओं को वहां स्थानांतरित करने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके थे। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी भी मुख्यालय से अनुपस्थित पाए गए थे। इसके बाद डीएम ने संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब, वेतन रोकने, कार्रवाई शुरू करने, CCTV और बायोमेट्रिक प्रणाली लगाने, दवा वितरण केंद्र शुरू करने तथा नियमित निगरानी के निर्देश दिए थे।

डीएम की सख्त कार्रवाई के कुछ ही दिनों बाद अस्पताल में जारी यह नया आदेश प्रशासनिक मंशा पर सवाल खड़े कर रहा है। एक ओर सरकार पारदर्शी स्वास्थ्य व्यवस्था और जवाबदेही की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन द्वारा वीडियोग्राफी पर रोक लगाने का आदेश चर्चा का विषय बन गया है।
अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पर हैं कि इस आदेश की समीक्षा की जाती है या नहीं। यह मामला केवल एक सूचना पत्र तक सीमित नहीं, बल्कि सरकारी अस्पतालों में पारदर्शिता, मीडिया की भूमिका और जवाबदेही से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है।
@MUSKAN KUMARI





