पटना: पेपर लीक मामलों की फास्ट ट्रैक जांच, शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार पर रोक, शिक्षा के निजीकरण का विरोध और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर बुधवार को पटना में छात्रों का प्रदर्शन हिंसक हो गया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में विभिन्न छात्र संगठनों ने गांधी मैदान गेट नंबर-10 से राजभवन मार्च निकाला।
जेपी गोलंबर के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की। पुलिस की अपील के बावजूद छात्र आगे बढ़ने लगे और बैरिकेडिंग तोड़ने का प्रयास किया, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, फिर लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच जमकर झड़प हुई। गांधी मैदान थाना प्रभारी अखिलेश कुमार मिश्रा समेत कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की सूचना है, जबकि कई छात्रों को भी चोटें आई हैं।

प्रदर्शन के कारण गांधी मैदान, जेपी गोलंबर और आसपास की प्रमुख सड़कों पर घंटों जाम लगा रहा, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में छात्रों ने UG, PG और PhD की बढ़ी हुई फीस वापस लेने, पिछड़े वर्ग के शोधार्थियों के लिए नॉन-नेट फेलोशिप लागू करने, 7.5 CGPA की अनिवार्यता खत्म करने, सभी छात्रों को समान डिग्री देने और पटना विश्वविद्यालय अधिनियम को समाप्त करने के प्रस्ताव को वापस लेने की भी मांग उठाई। छात्र संगठनों ने बिहार में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए अपने आंदोलन को जारी रखने का संकेत दिया।
@MUSKAN KUMARI





