पटना: बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को बेहद अहम माना जा रहा है। चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने इस सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान कर मुकाबले को हाई-प्रोफाइल बना दिया है। वहीं, भाजपा के लिए यह चुनाव मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व की पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है।
बांकीपुर सीट भाजपा के पूर्व विधायक नितिन नवीन के राज्यसभा जाने और विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई है। ऐसे में यह उपचुनाव अब केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है।
उम्मीदवारी की घोषणा के बाद प्रशांत किशोर ने इस चुनाव को सम्राट चौधरी सरकार के कामकाज पर ‘जनमत संग्रह’ बताया। उन्होंने कहा कि यदि जनता भाजपा को दोबारा चुनती है तो इसे सरकार के काम पर समर्थन माना जाएगा, जबकि जन सुराज की जीत बदलाव के संकेत के रूप में देखी जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बांकीपुर पटना की सबसे महत्वपूर्ण शहरी सीटों में गिनी जाती है। यहां शिक्षित और मध्यवर्गीय मतदाताओं के साथ कायस्थ, वैश्य, ब्राह्मण और राजपूत समुदाय का प्रभाव माना जाता है। लंबे समय से यह सीट भाजपा का मजबूत गढ़ रही है।

भाजपा ने अभी अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में नील रतन घोष (नीलू दा) और डॉ. अजय आलोक के नाम संभावित उम्मीदवारों के तौर पर चर्चा में हैं। पार्टी की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
यह उपचुनाव जन सुराज के लिए राजनीतिक स्वीकार्यता की पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है, जबकि भाजपा के लिए अपनी परंपरागत सीट बचाना प्रतिष्ठा का सवाल है। ऐसे में पूरे राज्य की नजर अब 30 जुलाई को होने वाले मतदान और 3 अगस्त 2026 को आने वाले नतीजों पर टिकी है, जो बिहार की आगामी राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
@MUSKAN KUMARI





