बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। ने बिहार विधान परिषद की 9 रिक्त सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव और एक खाली सीट पर उपचुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 18 जून को मतदान होगा और उसी दिन देर शाम परिणाम भी घोषित कर दिए जाएंगे।
चुनाव की घोषणा के साथ ही राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सभी दल अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। राजनीतिक विश्लेषक इस चुनाव को आने वाले बड़े चुनावी मुकाबलों का सेमीफाइनल मान रहे हैं।
सत्तारूढ़ के भीतर सीट बंटवारे को लेकर गहन मंथन चल रहा है। गठबंधन के घटक दल अधिक से अधिक सीटों पर दावा ठोक रहे हैं। 243 सदस्यीय विधानसभा में मजबूत संख्याबल के आधार पर एनडीए को 8 से 9 सीटों पर बढ़त की स्थिति में माना जा रहा है। वहीं विपक्षी महागठबंधन कम से कम एक सीट जीतने की रणनीति तैयार कर रहा है।
इस चुनाव में संभावित उम्मीदवारों को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों के मुताबिक कई नए चेहरों को विधान परिषद भेजा जा सकता है। सबसे अधिक चर्चा के नाम को लेकर हो रही है। इसके अलावा पंचायती राज मंत्री समेत कई नेताओं के नाम भी संभावित सूची में बताए जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में लॉबिंग और अंदरूनी समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी नेताओं की सक्रियता भी बढ़ गई है। माना जा रहा है कि कुछ मंत्रियों के लिए विधानमंडल की सदस्यता संवैधानिक रूप से आवश्यक होने के कारण उन्हें परिषद भेजा जा सकता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह चुनाव केवल सीटों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे बिहार के भविष्य के राजनीतिक समीकरणों की दिशा भी तय होगी। टिकट वितरण, अंदरूनी नाराजगी और संभावित भीतरघात ने चुनावी माहौल को और ज्यादा दिलचस्प बना दिया है।
@MUSKAN KUMARI





