बिहार पुलिस होगी पूरी तरह डिजिटल ICJS और AI तकनीक से अपराध नियंत्रण को मिलेगी नई ताकत

पटना। बिहार पुलिस अब तेजी से हाईटेक और डिजिटल व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। एडीजी (एससीआरबी एवं आधुनिकीकरण) ने बताया कि राज्य के सभी थानों को जल्द ही इंटर ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) से जोड़ दिया जाएगा। इस राष्ट्रीय प्रणाली के जरिए देशभर के थाना, न्यायालय, जेल, विधि विज्ञान प्रयोगशाला, अभियोजन और पुलिस तंत्र के बीच डाटा का आदान-प्रदान आसान होगा और केस ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि ICJS प्रणाली वर्ष 2022 में शुरू की गई थी, लेकिन अब इसके नए और उन्नत संस्करण को जल्द लागू किया जाएगा। इससे देशभर में पुलिस संबंधी डाटा साझा करने में एकरूपता आएगी और जांच प्रक्रिया अधिक तेज एवं प्रभावी होगी।

एडीजी के अनुसार बिहार में कुल 1382 थानों में से अभी 968 थाने सीसीटीएनएस (Crime and Criminal Tracking Network System) से जुड़ चुके हैं। अगले दो महीनों में 347 और थानों को इससे जोड़ा जाएगा, जबकि बाकी थानों को भी आगामी तीन महीनों में नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

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एडीजी ने कहा कि क्रि-मैक पोर्टल के जरिए जीरो एफआईआर के आदान-प्रदान की प्रक्रिया को मजबूत किया गया है। वहीं ई-साक्ष्य प्रणाली के तहत 22,848 अनुसंधानकर्ताओं में से 21,640 पदाधिकारियों का पंजीकरण हो चुका है। अब तक 3.99 लाख से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें 1.42 लाख से अधिक साक्ष्य आईडी बनाई गई हैं।

उन्होंने बताया कि पुलिसकर्मियों को एआई (Artificial Intelligence) सहित नई तकनीकों, सॉफ्टवेयर और डिजिटल प्रणालियों का लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रक्रिया निरंतर जारी है ताकि पुलिस बल तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बन सके।

सिटिजन सर्विस पोर्टल का जिक्र करते हुए एडीजी ने बताया कि इसकी शुरुआत दिसंबर 2025 में की गई थी। इसके माध्यम से नागरिक एफआईआर की कॉपी प्राप्त कर सकते हैं, घोषित इनामी अपराधियों की सूची देख सकते हैं, लापता व्यक्तियों की स्थिति जान सकते हैं और अज्ञात शव या व्यक्तियों की जानकारी हासिल कर सकते हैं। साथ ही कोई भी व्यक्ति अपनी पहचान गुप्त रखते हुए पुलिस को महत्वपूर्ण सूचना भी दे सकता है।

भविष्य की योजना पर बोलते हुए एडीजी ने कहा कि बिहार पुलिस अब “प्रीडिक्टिव पुलिसिंग” पर फोकस करेगी। एआई और उन्नत तकनीकों की मदद से अपराध के पैटर्न का विश्लेषण कर यह अनुमान लगाया जा सकेगा कि किस प्रकार की वारदात होने की संभावना है, ताकि अपराध होने से पहले ही उसे रोका जा सके।

@MUSKAN KUMARI

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Author: NCRLOCALDESK

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