- अगर पश्चिम बंगाल की राजनीति में ऐसा अप्रत्याशित जनादेश हकीकत बनता, तो यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे बड़ी सियासी पटकथाओं में दर्ज होता। 293 सीटों वाली विधानसभा में एनडीए को 206 सीटों का प्रचंड बहुमत मिलना सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में बड़े भूचाल जैसा असर डालने वाला घटनाक्रम माना जाता।
इस परिदृश्य में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस 81 सीटों पर सिमट जाती, जबकि भारतीय जनता पार्टी ऐतिहासिक जीत के साथ सत्ता में वापसी करती दिखती। लंबे समय से बंगाल की सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी को यह करारी शिकस्त राज्य की राजनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा करती।
मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे सुवेंदु अधिकारी का नाम सामने आता, जिन्हें संगठनात्मक पकड़ और जनाधार के लिहाज से मजबूत चेहरा माना जाता है। भवानीपुर सीट पर भी बड़ा उलटफेर देखने को मिलता, जहां सुवेंदु अधिकारी ममता बनर्जी को 15,114 वोटों से हराकर दूसरी बार मात देते। वहीं अग्निमित्रा पॉल और रूपा गांगुली जैसे नाम भी संभावित मुख्यमंत्री दावेदारों में चर्चा में रहते।

इस पूरे घटनाक्रम में एक दिलचस्प पहलू यह भी उभरता है कि नई सरकार को शपथ दिलाने वाले संवैधानिक प्रमुख आर. एन. रवि का संबंध बिहार से रहा है। पटना में जन्मे आर.एन. रवि भारतीय पुलिस सेवा और खुफिया ब्यूरो में लंबे समय तक अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया और 2019 में नगालैंड के राज्यपाल बने। इसके साथ ही उन्होंने मेघालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला।
18 सितंबर 2021 को उन्हें तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने प्रशासनिक और राजनीतिक मामलों में सक्रिय भूमिका निभाई। हाल ही में उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया, जहां वे नई सरकार के गठन की संवैधानिक प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते दिखते।
बहरहाल, इस काल्पनिक लेकिन प्रभावशाली जनादेश में भाजपा का कोई भी नेता मुख्यमंत्री बने, शपथ दिलाने वाला चेहरा बिहार से जुड़ा होना इस सियासी कहानी को और भी रोचक बना देता है।
@MUSKAN KUMARI







