एशियन टाइम्स स्पेशल रिपोर्ट
रिपोर्ट: तनवीर आलम शेख
नोटिस के बाद सख्ती: दीघा से बांस घाट तक अवैध निर्माणों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी
पटना से एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की खबर सामने आ रही है, जहां गंगा तट के किनारे अवैध निर्माणों के खिलाफ नगर निगम ने कमर कस ली है। दीघा से बांस घाट तक फैले इलाके में सीमांकन (डिमार्केशन) का काम तेज कर दिया गया है और आने वाले दिनों में कई निर्माणों पर बुलडोजर चलने की संभावना जताई जा रही है।
नगर निगम की टीम ने हाल ही में गंगा तट क्षेत्र में अभियान चलाकर उन भवनों और हिस्सों का सीमांकन शुरू किया है, जिन पर पहले से अवैध निर्माण के आरोप हैं। यह कार्रवाई 2023 में दर्ज विजिलेंस केस और कोर्ट के आदेशों के आधार पर की जा रही है।
प्रशासन के मुताबिक:
- कुल 19 संपत्तियों को चिन्हित किया गया है
- कुछ जगहों पर पूरी इमारत, तो कहीं आंशिक निर्माण को अवैध माना गया है
- पहले ही संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया जा चुका है
गंगा किनारे बढ़ता अवैध कब्जा
गंगा नदी के किनारे बसे इस इलाके में वर्षों से अवैध निर्माण का आरोप लगता रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई प्रभावशाली लोगों ने नियमों को ताक पर रखकर बड़े-बड़े निर्माण कर लिए, लेकिन अब प्रशासन सक्रिय हुआ है।
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत यह कार्रवाई जरूरी है, ताकि नदी तट को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा सके।
नोटिस के बाद बढ़ी हलचल
18 अप्रैल को नोटिस जारी होने के बाद इलाके में हलचल तेज हो गई है। जिन लोगों के भवन इस सूची में शामिल हैं, उनमें चिंता का माहौल है। कई लोग अब अपने दस्तावेज़ खंगाल रहे हैं, जबकि कुछ ने कानूनी लड़ाई की तैयारी भी शुरू कर दी है।
आगे क्या होगा?
प्रशासन का कहना है कि:
- सीमांकन पूरा होने के बाद
- नगर आयुक्त के आदेश से
- अवैध हिस्सों को हटाने की कार्रवाई शुरू होगी
इस दौरान भारी पुलिस बल की तैनाती भी की जा सकती है, ताकि किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या न हो।
लोगों में डर और सवाल
इस कार्रवाई को लेकर आम लोगों में कई सवाल भी उठ रहे हैं:
- क्या सिर्फ छोटे लोगों पर कार्रवाई होगी?
- बड़े रसूखदारों के निर्माण भी गिराए जाएंगे?
- क्या सभी को निष्पक्ष मौका मिलेगा?
स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर कार्रवाई हो, तो समान रूप से होनी चाहिए।
गंगा तट जैसे संवेदनशील इलाके में अवैध निर्माण न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी खतरा है। लेकिन कार्रवाई पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए, ताकि आम जनता का भरोसा बना रहे।
Author: Noida Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)









