नोएडा
नोएडा की साइबर थाना पुलिस ने सोशल मीडिया पर फर्जी और भड़काऊ वीडियो प्रसारित कर सार्वजनिक शांति भंग करने के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल की प्रवक्ता प्रियंका भारती समेत कई अन्य सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार, 11 अप्रैल 2026 को मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के एक पुराने वीडियो को नोएडा का बताकर वायरल किया गया, जिसमें पुलिस एक व्यक्ति के साथ मारपीट करती दिख रही थी। इसके अलावा, एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर सेक्टर-62 में आगजनी का एक फर्जी वीडियो भी फैलाया गया। जांच में सामने आया है कि इन भ्रामक पोस्ट्स का उद्देश्य शहर में भय और प्रशासन के प्रति अविश्वास का माहौल बनाना था।
साइबर क्राइम थाने में दर्ज शिकायत के मुताबिक, जितेंद्र कुमार दौसा नामक यूजर ने फेसबुक पर शहडोल का वीडियो “नोएडा का मजदूर” बताकर शेयर किया, जिससे लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की गई। वहीं ‘ItsKtyni’ नाम के एक्स हैंडल से आगजनी का झूठा वीडियो प्रसारित किया गया, जिसे जांच में पूरी तरह फर्जी पाया गया।
पुलिस की प्राथमिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यह पूरा मामला एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकता है। आरोप है कि जानबूझकर झूठी खबरें और वीडियो फैलाकर कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
इधर, नोएडा में हाल ही में हुए श्रमिक प्रदर्शन के हिंसक होने के पीछे बाहरी तत्वों की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस और एसटीएफ डिजिटल ट्रेल की जांच कर रही है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि अफवाहों और हिंसा की शुरुआत कहां से हुई।
जांच में यह भी सामने आया है कि हिंसा से एक दिन पहले करीब 140 व्हाट्सएप ग्रुप और कई संदिग्ध सोशल मीडिया हैंडल बनाए गए थे। अब एसटीएफ इन ग्रुप्स के एडमिन और संचालकों की पहचान में जुटी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल ट्रेल—जिसमें सोशल मीडिया गतिविधियां, सर्च हिस्ट्री और ऑनलाइन व्यवहार शामिल होता है—के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। इसके लिए फॉरेंसिक जांच का भी सहारा लिया जा रहा है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
@MUSKAN KUMARI






