टिहरी में बढ़ता भूस्खलन खतरा: 54% बुनियादी ढांचा हाई रिस्क जोन में

वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा, 57% आबादी भी खतरे के दायरे में

टिहरी जिले में भूस्खलन का खतरा लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए ताजा अध्ययन में सामने आया है कि जिले का 54 प्रतिशत बुनियादी ढांचा उच्च से बहुत अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में स्थित है। इतना ही नहीं, करीब 57 प्रतिशत आबादी भी इन्हीं संवेदनशील इलाकों में निवास कर रही है।

संस्थान के वैज्ञानिक डॉ नवीन चंद के नेतृत्व में की गई इस स्टडी का उद्देश्य भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की पहचान कर भविष्य की योजना और आपदा प्रबंधन को मजबूत करना है। अध्ययन के तहत जिले का विस्तृत मानचित्र तैयार किया गया है, जो जोखिम वाले क्षेत्रों को चिन्हित करता है।

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष जिले में 2612 छोटे-बड़े भूस्खलन की घटनाएं दर्ज की गईं, जो इस क्षेत्र की भौगोलिक संवेदनशीलता को दर्शाती हैं। वैज्ञानिकों ने भूस्खलन के 15 प्रमुख कारणों—जैसे ढाल, ऊंचाई, भू-आकृति, मानव गतिविधियां, भू-उपयोग, नदियों और सड़कों से दूरी—का विश्लेषण किया।

इन सभी कारकों के आधार पर पूरे जिले को पांच श्रेणियों में बांटा गया है—बहुत कम, कम, मध्यम, उच्च और बहुत उच्च जोखिम क्षेत्र। इसके बाद एक वैज्ञानिक मॉडल के जरिए परीक्षण कर निष्कर्ष निकाले गए।

विशेषज्ञों का मानना है कि अनियोजित विकास, सड़क निर्माण और बढ़ती मानवीय गतिविधियां इस खतरे को और बढ़ा रही हैं। ऐसे में इस अध्ययन से प्राप्त आंकड़े सरकार और प्रशासन के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं, ताकि संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण कार्यों को नियंत्रित किया जा सके और आपदा प्रबंधन की रणनीतियों को और प्रभावी बनाया जा सके।

@MUSKAN KUMARI

NCRLOCALDESK
Author: NCRLOCALDESK

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