पश्चिम एशिया संघर्ष का असर: कच्चे तेल के बावजूद भारत में एलपीजी संकट क्यों गहराया?

होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से सप्लाई चेन प्रभावित, भंडारण क्षमता और रणनीतिक योजना की कमी बनी बड़ी चुनौती

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को 20 दिन से अधिक हो चुके हैं और इस बीच हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। अमेरिका-इस्राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और तेहरान की जवाबी कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। ईरान ने जवाबी रणनीति के तहत इस्राइल के साथ-साथ पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इतना ही नहीं, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को भी बंद कर दिया गया है, जिससे भारत सहित दुनिया भर की कच्चे तेल और गैस की सप्लाई पर गहरा असर पड़ा है।

हालांकि भारत सरकार का दावा है कि देश में कच्चे तेल की पर्याप्त उपलब्धता है, लेकिन इसके बावजूद लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की कमी ने आम जनता और नीति निर्माताओं दोनों की चिंता बढ़ा दी है। सवाल उठता है कि जब कच्चा तेल उपलब्ध है तो एलपीजी संकट क्यों गहरा रहा है?

विशेषज्ञों के अनुसार, इस असंतुलन के पीछे सबसे बड़ा कारण भंडारण क्षमता में अंतर है। भारत ने कच्चे तेल के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves) विकसित किए हैं, जिससे आपातकालीन स्थितियों में कुछ समय तक जरूरत पूरी की जा सकती है। इसके विपरीत, एलपीजी के लिए ऐसी व्यापक और दीर्घकालिक भंडारण व्यवस्था अभी तक विकसित नहीं हो पाई है।

तकनीकी दृष्टि से भी एलपीजी का भंडारण कच्चे तेल की तुलना में अधिक जटिल है। एलपीजी को उच्च दबाव या अत्यंत निम्न तापमान पर तरल अवस्था में रखा जाता है, जिसके लिए विशेष टैंकों और सुरक्षा मानकों की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि इसका बड़े पैमाने पर भंडारण महंगा और चुनौतीपूर्ण होता है।

इसके अलावा, भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से खाड़ी देशों से आने वाली गैस आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे मांग और आपूर्ति के बीच अंतर तेजी से बढ़ गया है।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि देश में एलपीजी की मांग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है, खासकर उज्ज्वला योजना जैसी सरकारी पहलों के कारण। लेकिन इस बढ़ती मांग के अनुरूप भंडारण और आपूर्ति ढांचे का विस्तार नहीं हो पाया।

आगे की राह क्या?

मौजूदा संकट ने भारत के लिए ऊर्जा नीति में बदलाव की आवश्यकता को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि एलपीजी के लिए भी कच्चे तेल की तरह रणनीतिक भंडार विकसित किए जाने चाहिए। इसके अलावा, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने, घरेलू उत्पादन में वृद्धि और आपूर्ति स्रोतों के विविधीकरण पर भी जोर देना होगा।

पश्चिम एशिया का यह संकट एक बार फिर यह याद दिलाता है कि ऊर्जा सुरक्षा केवल उपलब्धता का नहीं, बल्कि मजबूत भंडारण और वितरण तंत्र का भी सवाल है।

@MUSKAN KUMARI

NCRLOCALDESK
Author: NCRLOCALDESK

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