पटना/पूर्णिया: पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में बिहार की राजनीति, शिक्षा-स्वास्थ्य व्यवस्था और सांस्कृतिक मुद्दों पर खुलकर बयान दिए। उन्होंने कहा कि यदि बिहार की जनता उन्हें एक बार मुख्यमंत्री बनने का अवसर दे, तो वे राज्य को “दुनिया में अलग पहचान” दिलाने का काम करेंगे।
“3 महीने में निजी अस्पताल और स्कूल सरकारी कर दूंगा”
पप्पू यादव ने दावा किया कि उनकी सरकार बनी तो तीन महीने के भीतर राज्य के सभी निजी अस्पतालों और निजी स्कूलों को सरकारी नियंत्रण में ले लिया जाएगा। उनके अनुसार, शिक्षा और स्वास्थ्य “मुनाफे का धंधा नहीं, सेवा का क्षेत्र” होना चाहिए।
उन्होंने कहा, “गरीब परिवारों को इलाज और पढ़ाई के लिए कर्ज लेना पड़ता है। अगर मौका मिला तो इन क्षेत्रों को पूरी तरह जनहित में व्यवस्थित करूंगा।”
बागेश्वर बाबा पर विवादित टिप्पणी
इंटरव्यू के दौरान पप्पू यादव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर धाम के प्रमुख) पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जो लोग धर्म के नाम पर “व्यापार” करते हैं, उन्हें वे बाबा नहीं मानते।
उन्होंने सवाल उठाया कि कुछ धार्मिक हस्तियों के पास करोड़ों की संपत्ति कैसे आती है। उनके बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में प्रतिक्रिया की संभावना बढ़ गई है।
पवन सिंह पर बैन की मांग
बिहार में डीजे पर अश्लील गानों के संभावित बैन को लेकर पूछे गए सवाल पर पप्पू यादव ने कहा कि अगर बीजेपी सच में अश्लीलता के खिलाफ है, तो उसे सबसे पहले भोजपुरी के “पावर स्टार” कहे जाने वाले पवन सिंह पर कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कई गाने अश्लीलता को बढ़ावा देते हैं। हालांकि, इस पर पवन सिंह या उनकी टीम की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक संकेत और आगामी चुनाव
पप्पू यादव के इन बयानों को आगामी चुनावों की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। वे लंबे समय से खुद को “जनता की आवाज” बताते रहे हैं और स्वास्थ्य-शिक्षा सुधार को अपना प्रमुख एजेंडा बताते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निजी संस्थानों के सरकारीकरण का मुद्दा व्यावहारिक और कानूनी चुनौतियों से जुड़ा है, जिस पर व्यापक बहस संभव है।
पप्पू यादव के इस इंटरव्यू ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है
निजी अस्पताल और स्कूलों के सरकारीकरण का प्रस्तावधार्मिक हस्तियों की संपत्ति पर सवाल भोजपुरी इंडस्ट्री में अश्लीलता पर कार्रवाई की मांग
अब देखना होगा कि इन बयानों पर राजनीतिक दलों, धार्मिक संगठनों और भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री की क्या प्रतिक्रिया आती है।
Author: Noida Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)







