फुलवारी ब्लॉक मारपीट कांड: 25 दिन बाद भी नहीं हुई गिरफ्तारी, नए आईओ की एंट्री से उठे सवाल

फुलवारी ब्लॉक मारपीट कांड के 25 दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं, CCTV फुटेज पर भी सवाल; पीड़ित ने जताई जान को खतरे की आशंका

पटना/फुलवारी शरीफ। फुलवारी शरीफ स्थित फुलवारी ब्लॉक परिसर में हुई मारपीट और कथित गोलीकांड को 25 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। घटना के बाद से पीड़ित पक्ष लगातार आरोपियों की गिरफ्तारी और CCTV फुटेज की जांच की मांग कर रहा है। लेकिन पीड़ित के मुताबिक अब तक न तो CCTV फुटेज उपलब्ध कराया गया है और न ही मामले में किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई है।

बताया जा रहा है कि घटना 1 अगस्त 2026 को फुलवारी ब्लॉक परिसर में हुई थी। आरोप है कि मौके पर मौजूद लोगों पर चारों तरफ से हमला किया गया और घटना के बाद परिसर में खून के निशान भी मिले। घटना से संबंधित CCTV और वीडियो फुटेज होने का दावा भी किया गया है। पहले प्रकाशित रिपोर्ट में भी CCTV फुटेज के आधार पर कार्रवाई की मांग और गिरफ्तारी नहीं होने का मुद्दा उठाया गया था। (AsianTimes)

तीन थानों की पुलिस की मौजूदगी के बावजूद कैसे हुई घटना?

मामले में सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा व्यवस्था को लेकर है। पीड़ित पक्ष का दावा है कि जनता दरबार के दौरान तीन थानों की पुलिस की मौजूदगी थी। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि पुलिस को पहले से लोगों के जुटने और विवाद की स्थिति की जानकारी थी, तो इतनी बड़ी घटना कैसे हुई?

घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और पीड़ित का मेडिकल भी कराया गया। लेकिन 25 दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं होने को लेकर पीड़ित पक्ष और स्थानीय लोगों में नाराजगी बताई जा रही है।

जांच अधिकारी गोपाल मिश्रा के ट्रांसफर पर भी उठे सवाल

इस मामले में तत्कालीन जांच अधिकारी गोपाल मिश्रा को लेकर भी पीड़ित पक्ष सवाल उठा रहा है। पीड़ित के अनुसार घटना के समय गोपाल मिश्रा मौके पर मौजूद थे और घटना की सूचना मिलने के बाद उन्होंने पीड़ित को मेडिकल के लिए भेजा।

अब मामले में जांच अधिकारी का ट्रांसफर हो चुका है और नए आईओ को जांच की जिम्मेदारी दी गई है। इसी बदलाव को लेकर पीड़ित पक्ष आशंका जता रहा है कि जांच कहीं प्रभावित या लंबी न हो जाए।

हालांकि, आईओ के ट्रांसफर को मामले को उलझाने की किसी साजिश से जोड़ने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। केवल ट्रांसफर के आधार पर किसी अधिकारी की भूमिका पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इस संबंध में पुलिस विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।

‘भू-माफिया खुलेआम घूम रहे हैं’ पीड़ित का आरोप

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि घटना से जुड़े कथित भू-माफिया अब भी खुलेआम घूम रहे हैं और किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पीड़ित ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है और आशंका व्यक्त की है कि उसे नुकसान पहुंचाया जा सकता है।

पीड़ित की ओर से प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाने की बात कही जा रही है। उसका कहना है कि यदि CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्य मौजूद हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

25 दिन बाद सबसे बड़ा सवाल—CCTV कहां है?

पूरे मामले में अब सबसे अहम सवाल यही है कि यदि घटना स्थल पर CCTV कैमरे लगे थे और घटना रिकॉर्ड हुई है, तो जांच एजेंसी ने अब तक फुटेज को सार्वजनिक अथवा न्यायिक प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत क्यों नहीं किया?

साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि पुलिस ने अब तक किन-किन लोगों से पूछताछ की, कितने लोगों की पहचान हुई, CCTV फुटेज को जब्त किया गया या नहीं और FIR में दर्ज आरोपों के आधार पर क्या कार्रवाई हुई।

उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग

पीड़ित पक्ष का कहना है कि वह मामले को लेकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात करेगा। उसकी मांग है कि जांच की निगरानी उच्च स्तर से की जाए, CCTV एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित कराया जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए।

एशियन टाइम्स इस मामले में सामने आए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है। आरोपी पक्ष का बयान और पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

फिलहाल 25 दिन बाद भी गिरफ्तारी और CCTV को लेकर बने सवाल पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहे हैं। अब देखना होगा कि नए जांच अधिकारी की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में क्या निर्णय लेते हैं।

एशियन टाइम्स इस मामले पर आगे भी अपडेट देता रहेगा।

@tanvir alam

Noida Desk
Author: Noida Desk

मुख्य संपादक (Editor in Chief)

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