नई दिल्ली: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के मुस्लिम युवाओं को राजनीतिक नेतृत्व में आगे आने की अपील वाले बयान पर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता शमा मोहम्मद ने ओवैसी पर निशाना साधते हुए उनकी पार्टी की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि अगर AIMIM मुस्लिम युवाओं को राजनीति में आगे बढ़ाना चाहती है, तो तेलंगाना की 119 विधानसभा सीटों में से केवल 9 सीटों पर ही चुनाव क्यों लड़ती है?
ओवैसी ने क्या कहा था?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में एक जनसभा को संबोधित करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने मुस्लिम युवाओं से स्थापित राजनीतिक परिवारों और नेताओं पर निर्भर रहने के बजाय खुद नेतृत्व करने की अपील की।
ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के युवाओं में भी दूसरे समुदायों की तरह नेतृत्व करने की क्षमता है, लेकिन उन्हें पर्याप्त अवसर और मंच नहीं मिल पाता।
उन्होंने नेहरू, गांधी और यादव परिवारों का जिक्र करते हुए कहा कि मुस्लिम युवाओं को अपनी राजनीतिक पहचान बनानी चाहिए और समाज के वंचित वर्गों को न्याय दिलाने के लिए आगे आना चाहिए।
ओवैसी के इस बयान को उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम नेतृत्व और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जोड़कर देखा जा रहा है।
शमा मोहम्मद ने AIMIM की रणनीति पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता शमा मोहम्मद ने ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए तेलंगाना में AIMIM की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए।
उन्होंने पूछा कि तेलंगाना में विधानसभा की कुल 119 सीटें हैं, फिर AIMIM केवल 9 सीटों पर ही चुनाव क्यों लड़ती है? यदि पार्टी मुस्लिम युवाओं को नेतृत्व का अवसर देना चाहती है, तो उन्हें अधिक सीटों पर उम्मीदवार क्यों नहीं बनाया जाता?
शमा मोहम्मद ने ओवैसी पर तीखी टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि उनकी राजनीति देश में विभाजनकारी सोच को बढ़ावा देती है। उन्होंने ‘भारत के अंदर पाकिस्तान बनाने’ संबंधी टिप्पणी भी की।
हालांकि, यह शमा मोहम्मद का राजनीतिक आरोप है। इसे ओवैसी की मंशा के प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर फिर छिड़ी बहस
इस बयानबाजी ने भारतीय राजनीति में मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधित्व और युवा नेताओं को अवसर देने के मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है।
एक ओर ओवैसी का तर्क है कि मुस्लिम युवाओं को अपनी राजनीतिक पहचान बनाकर नेतृत्व की भूमिका निभानी चाहिए। दूसरी ओर, कांग्रेस नेता उनकी पार्टी की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाते हुए पूछ रही हैं कि क्या AIMIM अपने ही राज्य में इस विचार को पर्याप्त रूप से लागू कर रही है।
इस विवाद के केंद्र में दो अहम सवाल हैं—क्या राजनीतिक दल युवाओं को पर्याप्त अवसर दे रहे हैं और क्या उनके सार्वजनिक बयानों तथा उम्मीदवारों के चयन की रणनीति में समानता दिखाई देती है?
फिलहाल, इस राजनीतिक बहस में दोनों पक्षों के बयानों और चुनावी फैसलों को अलग-अलग समझना जरूरी है। अंतिम आकलन के लिए पार्टियों के उम्मीदवार चयन, चुनावी प्रदर्शन और युवा नेताओं को दिए गए अवसरों से जुड़े तथ्यों को देखना होगा।
स्रोत: ANI की रिपोर्ट के आधार पर प्रकाशित मीडिया रिपोर्टें।
Author: Noida Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)





