फतेहपुर सीकरी के इमलाक में सरकारी जमीन पर अवैध प्लॉटिंग का आरोप, छह माह बाद भी अपनी भूमि के कब्जे को भटक रहा शिकायतकर्ता

फतेहपुर सीकरी के इमलाक में सरकारी जमीन पर अवैध प्लॉटिंग का आरोप, छह माह बाद भी अपनी भूमि के कब्जे को भटक रहा शिकायतकर्ता

स्मारक की मुख्य दीवार से 100 मीटर के दायरे में प्लॉट बेचने का दावा, लेखपाल ने किया स्थलीय निरीक्षण; राजस्व टीम गठित कर निष्पक्ष पैमाइश और अतिक्रमण हटाने की मांग

फतेहपुर सीकरी (आगरा)।ऐतिहासिक नगरी फतेहपुर सीकरी के मौजा आराजी इमलाक में कथित अवैध प्लॉटिंग, सरकारी भूमि पर कब्जे और निजी जमीन के विवाद ने तूल पकड़ लिया है। गाटा संख्या 245, 246, 247 एवं 248 से जुड़े इस मामले में शिकायतकर्ता धीरज कुमार पुत्र रमेश चंद, निवासी कोटला गली, फतेहपुर सीकरी ने संबंधित पक्षों पर निर्धारित भूमि से अधिक क्षेत्र में प्लॉटिंग करने और सरकारी जमीन पर भी प्लॉट काटने के आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता का यह भी दावा है कि स्मारक की मुख्य दीवार से 100 मीटर के दायरे में प्लॉट बेचे गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए 29 अक्टूबर 2026 को क्षेत्रीय लेखपाल भूपेंद्र सिंह ने मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया। अब प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

बिना आबादी घोषित कराए प्लॉटिंग का आरोप

शिकायतकर्ता के अनुसार, संबंधित भूमि को नियमानुसार आबादी घोषित कराए बिना ही प्लॉटिंग कर लोगों को प्लॉट बेचे गए। आरोप है कि इस प्रक्रिया में आवश्यक विभागीय अनुमतियों की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है। मामला फतेहपुर सीकरी के ऐतिहासिक स्मारक क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है। हालांकि, प्लॉटिंग, भूमि की श्रेणी और अनुमतियों से संबंधित आरोपों की पुष्टि राजस्व अभिलेखों तथा संबंधित विभागों की जांच के बाद ही हो सकेगी।

छह माह बाद भी नहीं मिला भूमि पर कब्जा

शिकायतकर्ता धीरज कुमार का कहना है कि उनकी भूमि को लेकर पूर्व में भी उच्चाधिकारियों के निर्देश पर किरावली क्षेत्र के राजस्व अधिकारियों द्वारा पैमाइश कराई गई थी। उनके आरोप के मुताबिक, उस समय भी जमीन पर कब्जे से संबंधित स्थिति सामने आई थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि संबंधित पक्ष ने शांतिपूर्ण तरीके से कब्जा हटाने की बात कही थी, लेकिन लगभग छह माह बीतने के बावजूद उन्हें अपनी भूमि पर वास्तविक कब्जा नहीं मिल पाया है। उनका कहना है कि लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

 

 

सरकारी भूमि पर प्लॉट काटने का भी दावा

मामले में एकता ग्रामीण सहकारी समिति तथा शैलेन्द्र सिंह और राजेन्द्र सिंह से जुड़े पक्ष के संबंध में भी कथित अवैध कब्जे और प्लॉटिंग की शिकायत की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि संबंधित पक्ष ने अपने हिस्से से अधिक भूमि पर प्लॉटिंग करने के साथ सरकारी भूमि पर भी प्लॉट काटे हैं। यदि जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और अन्य काश्तकारों के भूमि अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े हो सकते हैं।

 डीएम और एसडीएम तक पहुंचा मामला, लेखपाल ने किया निरीक्षण

शिकायतकर्ता के मुताबिक, मामले को लेकर जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी, आगरा के समक्ष भी प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए गए हैं। इसी क्रम में 29 अक्टूबर को क्षेत्रीय लेखपाल भूपेंद्र सिंह ने मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया। अब प्रकरण में राजस्व अभिलेखों के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए जाने और आगे की कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।

राजस्व टीम गठित कर निष्पक्ष पैमाइश कराने की मांग

शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए राजस्व विभाग की टीम गठित की जाए। संबंधित गाटा संख्या 245, 246, 247 और 248 की दोबारा पैमाइश कर सरकारी तथा निजी भूमि की सीमाएं स्पष्ट की जाएं। साथ ही, स्मारक की मुख्य दीवार से संबंधित प्रतिबंधित क्षेत्र और लागू नियमों के अनुपालन की जांच संबंधित सक्षम विभाग से कराई जाए।

शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि जांच में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण या निजी भूमि पर अवैध कब्जा प्रमाणित होता है, तो नियमानुसार कार्रवाई कर अतिक्रमण हटाया जाए और उन्हें उनकी भूमि पर वैधानिक कब्जा दिलाया जाए।

अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

फिलहाल, स्थलीय निरीक्षण के बाद मामले में आगे की कार्रवाई का इंतजार है। सबसे अहम सवाल यह है कि संबंधित भूमि की वास्तविक स्थिति क्या है, सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोपों में कितनी सच्चाई है और प्लॉटिंग के लिए आवश्यक अनुमतियां ली गई थीं या नहीं। इन सवालों का जवाब राजस्व अभिलेखों, विभागीय जांच और आधिकारिक रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा। अब देखना होगा कि प्रशासन शिकायत को कितनी गंभीरता से लेते हुए मामले का निष्पक्ष निस्तारण करता है और शिकायतकर्ता को उनकी भूमि के संबंध में न्याय मिल पाता है या नहीं।

Noida Desk
Author: Noida Desk

मुख्य संपादक (Editor in Chief)

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