नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उनके साथ संगठन के वरिष्ठ नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को भी हिरासत में लिया गया। इसके बाद आंदोलन की कमान अजिंक्य शिंदे को सौंपे जाने की खबर सामने आई है।
कौन हैं अजिंक्य शिंदे?
अजिंक्य शिंदे महाराष्ट्र के अलीबाग के रहने वाले हैं। वह कंप्यूटर साइंस से स्नातक हैं और पुणे की एक आईटी कंपनी में कई वर्षों तक काम कर चुके हैं। राजनीति में आने से पहले उनका करियर तकनीकी क्षेत्र में था।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से प्रभावित होकर उन्होंने आम आदमी पार्टी के साथ काम किया था। उन्होंने 2016 के गोवा विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रचार अभियान में भाग लिया और बाद में महाराष्ट्र में भी संगठन के लिए काम किया।
CJP में क्या है उनकी भूमिका?
अजिंक्य शिंदे कॉकरोच जनता पार्टी में राष्ट्रीय संगठन प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। संगठन की स्थापना के समय से ही वह अभिजीत दिपके के साथ जुड़े हुए हैं। NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली में हुए प्रदर्शनों में भी उन्होंने भाग लिया था।
10 अक्टूबर को अभिजीत दिपके का एक वीडियो संदेश सामने आया, जिसमें उन्होंने अपनी और अपने साथियों की हिरासत का उल्लेख करते हुए आंदोलन का नेतृत्व अजिंक्य शिंदे को सौंपने की बात कही। इसके बाद शिंदे ने आंदोलन जारी रखने का संदेश दिया।
क्या है CJP की मांग?
CJP ने जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर प्रदर्शन बुलाया था। संगठन का कहना है कि मतदाता सूची में नामों को लेकर उठ रहे सवालों पर पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
हालांकि, प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने और दिल्ली में निषेधाज्ञा लागू होने के कारण पुलिस ने कार्रवाई की। पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की मांगों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
क्या अजिंक्य शिंदे बनेंगे CJP के स्थायी प्रमुख?
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में अजिंक्य शिंदे को आंदोलन की कमान सौंपे जाने की पुष्टि है। लेकिन उन्हें CJP का स्थायी राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने की अलग आधिकारिक घोषणा की पुष्टि नहीं हुई है। अगस्त 2026 में घोषित संगठनात्मक ढांचे में अभिजीत दिपके राष्ट्रीय संयोजक, जबकि सौरव दास और आशुतोष रांका सह-संयोजक थे।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अजिंक्य शिंदे के नेतृत्व में आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है और संगठन अपनी आगे की रणनीति को किस तरह लागू करता है।
एशियन टाइम्स के लिए विशे
Author: Noida Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)






