पटना | बिहार
बिहार में सरकारी टेंडर आवंटन से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के घोटाले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले के केंद्र में ठेकेदार ऋषु रंजन सिन्हा उर्फ ऋषु श्री हैं। आरोप है कि सरकारी विभागों में टेंडर हासिल करने के लिए अधिकारियों और निजी ठेकेदारों के बीच कथित गठजोड़ काम कर रहा था। अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच कई वरिष्ठ IAS अधिकारियों तक पहुंच गई है।
कौन हैं ऋषु श्री?
ऋषु श्री का पूरा नाम ऋषु रंजन सिन्हा बताया गया है। वह Reliable Infra Services Private Limited से जुड़े ठेकेदार हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, उनकी कंपनियां बिहार के कई सरकारी विभागों में ठेके और सब-कॉन्ट्रैक्ट का काम करती थीं।
आरोप है कि सरकारी टेंडर की गोपनीय तकनीकी जानकारी पहले ही हासिल कर ली जाती थी। इसके बाद टेंडर की शर्तों को कथित तौर पर कुछ चुनिंदा कंपनियों के अनुकूल बनाया जाता था, जिससे उन्हें सरकारी काम मिलने में फायदा होता था।
4000 पन्नों की चार्जशीट में सात आरोपी
बिहार पुलिस की विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने जून 2026 में इस मामले में लगभग 4,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी।
चार्जशीट में सात लोगों को आरोपी बनाया गया है।
- ऋषु रंजन सिन्हा उर्फ ऋषु श्री – ठेकेदार
- संजीव हंस – IAS अधिकारी
- मुमुक्षु चौधरी – पूर्व संयुक्त सचिव
- तारिणी दास – पूर्व मुख्य अभियंता
- उमेश कुमार सिंह – कार्यपालक अभियंता
- संतोष कुमार – ठेकेदार से जुड़ा कर्मचारी
- पवन कुमार – निजी कंपनी के निदेशक
जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी ठेके दिलाने में इन लोगों की अलग-अलग भूमिकाएं थीं। हालांकि, आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत को करना है।
कई IAS अधिकारियों तक पहुंची ED की जांच
27 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, ED ने मामले में सात IAS अधिकारियों को समन भेजा था।
ThePrint की 29 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, ED ने कई अधिकारियों से पूछताछ भी की। इनमें अभिलाषा कुमारी शर्मा, धर्मेंद्र कुमार, सुनील कुमार यादव और संतोष कुमार मल्ल के नाम शामिल हैं। आनंद किशोर को भी पूछताछ के लिए बुलाए जाने की खबर सामने आई।
योगेश सागर को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था।
जांच एजेंसी कथित तौर पर अधिकारियों और ठेकेदार के बीच संपर्क, मोबाइल चैट, कॉल डिटेल और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि समन या पूछताछ का मतलब किसी अधिकारी का दोषी होना नहीं है।
265 करोड़ से अधिक की संपत्ति की जांच
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जांच के दौरान ऋषु श्री से जुड़ी 265 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का उल्लेख सामने आया है।
जांच एजेंसियां इस संपत्ति के स्रोत, कंपनियों के लेनदेन और सरकारी ठेकों से जुड़े वित्तीय संबंधों की जांच कर रही हैं।
पटना हाईकोर्ट की टिप्पणी से बढ़ी हलचल
इस मामले में 15 अक्टूबर 2026 को पटना हाईकोर्ट ने ED और बिहार की विशेष निगरानी इकाई की जांच पर सवाल उठाए थे।
अदालत ने सवाल किया कि जब जांच में कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, तो उन सभी के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि कहीं जांच एजेंसियां कुछ लोगों को बचाने और कुछ को फंसाने की कोशिश तो नहीं कर रही हैं।
अदालत ने ऋषु श्री की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए संकेत दिया कि इस कथित नेटवर्क में पर्दे के पीछे दूसरे प्रभावशाली लोग भी हो सकते हैं।
मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर 2026 को निर्धारित बताई गई है।
सबसे बड़ा सवाल: टेंडर घोटाले का असली नेटवर्क कितना बड़ा?
बिहार के इस कथित टेंडर घोटाले ने सरकारी विभागों में टेंडर आवंटन की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब सवाल यह है कि क्या ऋषु श्री ही इस पूरे नेटवर्क का मुख्य चेहरा थे या सरकारी व्यवस्था में बैठे कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका भी सामने आएगी?
क्या सरकारी टेंडर की गोपनीय जानकारी पहले ही चुनिंदा ठेकेदारों तक पहुंचाई जाती थी? क्या इस कथित नेटवर्क में अभी और बड़े नाम सामने आएंगे?
इन सवालों के जवाब अब ED और SVU की जांच तथा अदालत की आगे की सुनवाई से सामने आने की उम्मीद है।
Asian Times इस मामले की जांच और न्यायिक कार्यवाही पर नजर बनाए हुए है।
नोट: इस रिपोर्ट में उल्लिखित आरोप जांच एजेंसियों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं। किसी भी आरोपी की दोषसिद्धि अदालत द्वारा तय की जानी है।
Author: Noida Desk
मुख्य संपादक (Editor in Chief)





