चीन के लिए चिंता! भारत लगातार बढ़ा रहा है न्यूक्लीयर पावर, बीजिंग भी है रेंज में

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फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स की 2022 की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत अपने परमाणु हथियार और इसके ओपरेट करने में लगातार ही सुधार कर रहा है और नई तकनीकि का इस्तेमाल बढ़ा रहा है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की परमाणु रणनीति पाकिस्तान पर फोकस करते हुए बनाई गई है, लेकिन इसका जोर अब चीन की ओर बढ़ता नजर आ रहा है. एफएएस की रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में उपलब्ध तकनीकि को बदलने के लिए कम से कम चार नई हथियार टेक्नोलॉजी विकसित की जा रही हैं. इनमें न्यूक्लीयर क्षमता वाले एयरक्राफ्ट, लैंड बेस्ड डिलेवरी सिस्सटम और सबमरीन लॉन्च्ड मिसाइले शामिल हैं. भारत त्रिस्तरीय क्षमताओं को न्यूक्लियर मिसाइलों के उपयोग के लिए और भी विकसित कर रहा है.

इस रिपोर्ट को हंस एम क्रिसतेनसेन और मैट कोर्डा ने मिलकर तैयार किया है. रिपोर्ट के अनुसार, ‘भारत फिलहाल 8 अलग-अलग न्यूक्लीयर कैपेबल सिस्सटम ओपरेट कर रहा है. दो एयरक्राफ्ट, चार लैंड बेस्ड बैलिस्टिक मिसाइलें और दो सी बेस्ड बैलिस्टिक मिसाइलें. कम से कम चार नए सिस्टम डेवलपमेंट में हैं. इनमें से कई बहुत जल्द तैयार हो सकते हैं और बैटल फील्ड में आ सकते हैं. वहीं बीजिंग भी भारत की मिसाइल सिस्टम की रेंज में है.’

अनुमान है कि भारत ने “लगभग 700 किलोग्राम (प्लस या माइनस 150 किलोग्राम) हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम” का उत्पादन किया है, जो 138 से 213 परमाणु हथियारों के लिए पर्याप्त है. हालांकि, अभी तक, सभी सामग्री को परमाणु हथियार में परिवर्तित नहीं किया गया है. FAS के अनुसार, भारत के पास अपने भंडार में लगभग 160 परमाणु हथियार हैं और नई मिसाइलों को चलाने के लिए और अधिक की आवश्यकता होगी. पाकिस्तान के लिए यहीं आंकड़े 165 हैं, चीन के पास 350, यूएस के पास 5,428 और रूस के पास 5,977 परमाणु हथियार हैं.

भारत के हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम का स्रोत मुंबई में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र परिसर में ध्रुव रिएक्टर रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में कम से कम एक और रिएक्टर बनाकर अपनी प्लूटोनियम उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय विस्तार करने की योजना है. एफएएस के अनुसार, जबकि भारत का “प्राथमिक निवारक संबंध” पाकिस्तान के साथ है, इसका परमाणु आधुनिकीकरण इंगित करता है कि यह चीन के साथ अपने भविष्य के रणनीतिक संबंधों पर अधिक जोर दे रहा है.

विशाखापत्तनम से लगभग 50 किमी दूर रामबिल्ली गांव में INS वर्षा नाम का एक सुपर सीक्रेट बेस निर्माणाधीन है, जिसमें पहाड़ में कई सुरंगें, बड़े पियर और परमाणु पनडुब्बियों के लिए सपोर्ट सुविधाएं हैं.

TV9 Bharatvarsh

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