सीमापार से घुसपैठ रुकने और लांचपैड ध्वस्त होने से आतंकियों के हौसले पस्त

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नई दिल्ली. कश्मीर में आतंकियों के हौसले पस्त हैं. सीमापार करके कश्मीर में घुसपैठ करके आ रहे आतंकी और स्थानीय स्तर पर आतंकी गतिविधियों से जुड़ने वाली लोग, हफ्ते भर में या तो पकड़े जाते हैं या फिर सुरक्षाबल उनका सफाया कर दे रहे हैं. एक साल पहले तक यह स्थिति थी कि घाटी में 200 से ज्यादा आतंकी सक्रिय थे, लेकिन अब यह संख्या नाममात्र की रह गई है.

सेना से जुड़े सूत्रों ने बताया कि नियंत्रण रेखा और सीमा पर चौकसी ज्यादा पैनी होने के कारण आतंकियों के लिए घुसपैठ मुश्किल हो रही है. कश्मीर में अनुच्छेद-370 हटाए जाने के बाद सेना ने नियंत्रण रेखा के पास मौजूद आतंकी लॉन्चपैड को ध्वस्त किया है. पाकिस्तान की तरफ से हालांकि आतंकियों को कश्मीर में घुसाने की कोशिशें हो रही हैं, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो पा रहा है.पिछले दो महीनों में जो इक्का-दुक्का आतंकी घुसपैठ में कामयाब भी रहे तो वे कुछ ही दिनों के भीतर मुठभेड़ में मारे गए या फिर गिरफ्तार कर लिए गए.

सूत्रों के मुताबिक कश्मीर में तीन महीने से प्रीपेड इंटरनेट सेवाएं बंद होने और संचार के अन्य साधनों का इस्तेमाल निगरानी में होने से बड़ा फायदा हुआ है. इससे कट्टरपंथी गुटों और पाकिस्तानी आतंकी संगठनों की ओर से युवाओं को भड़काने की कोशिशें नाकाम हुई हैं. सेना के दावे को माना जाए तो पिछले तीन महीनों में स्थानीय स्तर पर एक भी आतंकी की भर्ती नहीं हुई है. ऐसी भर्ती को सेना बीते साल से हतोत्साहित कर रही है और साल की शुरुआत में सुरक्षाबलों ने दावा किया था कि नए आतंकी बंदूक उठाने के छह महीने के भीतर ही मारे या पकड़े जा रहे हैं.

सुरक्षाबलों का कहना है कि नए आतंकियों की भर्ती का चक्र करीब-करीब टूट चुका है. इसलिए ध्यान इस बात पर है कि स्थिति को कायम रखा जाए. सेना से जुड़े सूत्रों के अनुसार इस साल अब तक सीमापार से करीब 60-70 आतंकियों के घुसपैठ की खबर है, लेकिन सभी या तो मारे जा चुके हैं या सुरक्षाबलों के कब्जे में हैं.

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