राज्य सरकार ने दिये प्रमोशन में आरक्षण पर रोक के आदेश

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रायपुर। हाईकोर्ट से प्रमोशन में आरक्षण पर रोक के बाद अब राज्य सरकार ने सभी विभागों को हाईकोर्ट के फैसले की कॉपी भेजकर प्रमोशन में रोक की सूचना भेजवा दी है। सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों के प्रमुख, सचिव, कमिश्नर, कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ को संबोधित पत्र में कहा है कि आदेश में कहा गया है कि इस विभाग की अधिसूचना दिनांक 22.10.19 द्वारा छत्तीसगढ़ लोक सेवा प्रमोशन नियम 2003 के नियम 5 के स्थान पर नया नियम 5 प्रतिस्थापित किया गया था। उक्त अधिसूचना के विरूद्ध उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गयी है। जिसे माननीय न्यायालय द्वारा पारित किये गये अंतरिम आदेश 9 दिसंबर 2019 की छायाप्रति जानकारी हेतु संलग्न प्रेषित है। माना जा रहा है कि इस पत्र के जरिये सरकार ने सभी कलेक्टर, कमिश्नर, जिला पंचायत सीईओ को पत्र भेजकर ये जानकारी दे दी है कि प्रमोशन में आरक्षण मामले में फिलहाल हाईकोर्ट ने स्टे दे दिया है, लिहाजा उस आदेश के परिपालन में आगे अब किसी भी तरह की कोई कार्रवाई नहीं कि जायेगी। मामले में राज्य सरकार को बीस जनवरी की तारीख़ दी गई है। 20 जनवरी को इस मसले पर दूबारा बहस होगी। यह वही प्रकरण है जिसमें राज्य सरकार को बीते 2 दिसंबर को कोर्ट को कहना पड़ा था। यह नियम बनाने में नियमों और सुको तथा हाईकोर्ट के निर्देशों का ध्यान अधिकारियों ने नहीं दिया है..हम माफ़ी चाहते हैं और एक सप्ताह में गलती सुधारेंगे। इस मामले में डिवीजन बेंच वन याने चीफ़ जस्टिस रामचंद्रन और जस्टिस पी पी साहू ने सुनवाई की थी। राज्य की ओर से आए जवाब से कोर्ट संतुष्ट नहीं हुई और हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है।

राज्य सरकार ने 22 अक्टूबर को नोटिफिकेशन जारी कर प्रमोशन में आरक्षण लागू कर दिया था, जिसके अनुसार स्ञ्ज को 32 प्रतिशत और स्ष्ट वर्ग को 13 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था। इस आदेश के खिलाफ़ विष्णु प्रसन्न तिवारी और गोपाल सोनी ने याचिका दायर करते हुए इस नोटिफिकेशन को गलत बताते हुए इसे रद्द किए जाने की माँग की है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्देश सर्वोपरि है जिसमें जरनैल सिंह के मसले पर सुको ने कहा है।

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