26 जनवरी को राजधानी के जनपथ पर होने वाले गणतंत्र दिवस परेड

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पटना। 26 जनवरी को राजधानी के जनपथ पर होने वाले गणतंत्र दिवस परेड में इस बार बिहार की झांकी देखने को नहीं मिलेगी। बिहार सूचना केंद्र के अधिकारी के मुताबिक, प्रदेश सरकार ने जल-जीवन-हरियाली मिशन को लेकर झांकी का प्रस्ताव दिया था जिसे स्वीकार नहीं किया गया। केंद्र सरकार के अधिकारियों ने राज्य के इस प्रस्ताव की प्रशंसा की लेकिन कहा कि झांकी के लिए जो मानदंड तय किए गए हैं, यह थीम इसके मुताबिक नहीं है। 2019 में भी बिहार को रिपब्लिक डे परेड में शामिल नहीं किया गया था।

 

‘मानदंडों पर खरा नहीं उतरा प्रस्ताव’

बिहार सूचना केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार महत्वाकांक्षी योजना जेजेएच मिशन पर काम कर रहा है जिसके जरिए जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने और जल संरक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। गणतंत्र दिवस के परेड के लिए इसी वजह से यह थीम दिया गया था। सितंबर में केंद्र सरकार के रक्षा विभाग के पास हमने यह प्रस्ताव भेजा था लेकिन मंत्रालय ने इसे ठुकरा दिया। हलांकि उन्होंने थीम की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह तय मानदंड के मुताबिक नहीं है। इस थीम पर राज्य सरकार झांकी नहीं बना सकती है।

आखिरी बार 2015 में बिहार ने की थी शिरकत

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार गणतंत्र दिवस की झांकी को तभी स्वीकृति मिल रही है जब चयन समिति उसे तीन राउंड की जांच के बाद तय किए गए मानदंडों पर खऱा पाती है। बिहार सरकार के प्रस्ताव को 2019 में भी चयन समिति ने यही कारण बताकर अस्वीकार कर दिया था। अधिकारी के मुताबिक, आखिरी बार 2015 में बिहार परेड की झांकी में शामिल हुआ था जो महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह के 100 साल पूरे होने की थीम पर आधारित था।

 

महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल के प्रस्ताव भी खारिज

गणतंत्र दिवस परेड में इस बार महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल की झांकी भी देखने को नहीं मिलेगी। दोनों राज्यों के प्रस्तावों को भी रक्षा मंत्रालय ने ठुकरा दिया। इसकी आलोचना करते हुए एनसीपी की सुप्रिया सुले ने इसे महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल का अपमान बताया। शिवसेना सांसद संजय राउत ने इसे साजिश बताते हुए भाजपा पर निशाना साधा।

 

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