पाकिस्तान में लाल किला!

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लाल किला देश की अमूल्य विरासत है। इस मुगल विरासत की जितनी प्रसद्धि देश में है उतना ही मशहूर ये विदेश में भी है। यूनेस्को ने लाल किले को विशेव धरोहर के खिताब से नवाजा है। अकसर हमारे सामने दिल्ली का जिक्र आते ही लाल किला जहन में आ जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि लाल किला सिर्फ दिल्ली में ही नहीं बल्कि पाकिस्तान में भी है।

दरअसल पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से महज तीन घंटे की दूरी पर स्थित मुजफ्फराबाद शहर में एक किला है, जिसे मुजफ्फराबाद फोर्ट और रुट्टा किला के नाम से जाना जाता है। इस किले को पाकिस्तान का लाल किला कहा जाता है।

हालांकि इस ऐतिहासिक किले का निर्माण किसी मुगल शासक ने नहीं बल्कि चक शासकों ने मुगलों से बचने के लिए करवाया था।हालांकि बाद इसका निर्माण मुगलों द्वारा ही खत्म कराया गया, जिसके कारण इस किले में मुगल स्थापत्य देखने को मिलती है। यह किला 87 साल में बन कर तैयार हुआ था।

इस किले को बनाने का काम 1559 में शुरू हुआ था, लेकिन 1587 में मुगलों ने यहां कब्जा कर लिया, जिसके बाद किले को बनाने का काम कछुए की गति से चलने लगा। जिसके बाद यह किला साल 1646 में पूरी तरह बनकर तैयार हुआ।

पाकिस्तान के इस लाल किले से बोम्बा रियासत के सुल्तान मजफ्फर खान ने शासन किया था। मुजफ्फर खान ने ही मुजफ्फराबाद को भी बसाया था।

लगभग 200 साल के लम्बे अंतराल के बाद साल 1846 में इस किले का जीर्णोद्धार कराया गया। डोगरा वंश के महाराजा गुलाब सिंह के शासन के दौरान इस किले की खासी अहमियत थी। डोगरा वंश की सेना ने साल 1926 तक इस किले में पनाह ली।

हालांकि 1926 के बाद से यह लाल किला पूरी तरह से विरान हो गया। तीन तरफ से नीलम नदी से घिरा यह किला किसी जमाने में अपनी कुदरती खूबसूरती के लिए प्रख्यात था लेकिन आजादी के बाद से इस किले के प्रति पाकिस्तान सरकार की अनदेखी ने इसे एक खण्डहर में तब्दील कर दिया है। वर्तमान में लाल किले का अस्तित्व तो है मगर महज लाल पत्थरों से बने खण्डहर के रूप में।

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