राजस्थान: आदिवासी इलाके के इस स्कूल में दी जा रही है मॉडर्न तरीके से एजुकेशन

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प्रतापगढ़. प्रतापगढ़ जिला आदिवासी बाहुल्य (Tribal Area) क्षेत्र है, लेकिन यहां भी अब शिक्षा (Education) के प्रति लोगों की जागरूकता (awareness) लगातार बढ़ती जा रही है. शिक्षा विभाग के साथ-साथ ग्रामीण भी अब इस क्षेत्र में अपना सहयोग देने के लिए लगातार आगे आ रहे हैं. ग्रामीणों के सहयोग के चलते अरनोद उपखंड के चकुंडा गांव का सरकारी स्कूल अब निजी स्कूलों को भी पीछे छोड़ता नजर आ रहा है. इस स्कूल को इस स्थिति में लाने के लिए स्कूल के स्टाफ के साथ-साथ ग्रामीणों का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है. ग्रामीण और विद्यालय के स्टाफ की मेहनत के चलते अभी हाई स्कूल स्कूल पूरे उपखंड क्षेत्र में सर्व सुविधा युक्त पहला स्कूल बन गया है. इस स्कूल में 494 बच्चे हैं अध्ययनरत

प्रतापगढ़ जिले के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय चकुंडा में वर्तमान में 494 बच्चे अध्ययनरत हैं. आस-पास के गांव से आने वाले वाले से ये बच्चे और उनके अभिभावक अपने क्षेत्र के पास स्कूल होने के बावजूद इन बच्चों को यही शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेजते हैं और इसके पीछे कारण है. यहां की बेहतर सुविधाएं जो निजी स्कूल से भी काफी आगे हैं.

इस स्कूल में छात्रों को मिल रही है ये सुविधाएं ग्रामीणों और विद्यालय स्टाफ ने अपने बच्चों को उच्च स्तरीय शिक्षा मिले, इसके लिए विद्यालय में जन सहयोग से कंप्यूटर लैब, सीसीटीवी, आरओ वॉटर, बैठने के लिए टेबल, कुर्सी सहित कई सुविधाएं उपलब्ध करवाई है. इतना ही नहीं, बच्चों को विद्यालय में स्वस्थ वातावरण मिले इसके लिए विद्यालय में गार्डन और पेड़-पौधे लगाए गए हैं और इनकी देख रहे विद्यालय का स्टाफ ही करता है.

प्रोजेक्टर के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जा रहा हैप्रधानाचार्य जयंतीलाल जैन ने कहा कि बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि पैदा हो इसके लिए यहां कंप्यूटर लैब में बच्चों को प्रोजेक्टर के माध्यम से पढ़ाई करवाई जाती है. इतना ही नहीं, यहां बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा भी कराया जाता है जिससे कि उनके ज्ञान में लगातार अभिवृद्धि की जा सके. स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि बच्चों के मानसिक विकास के साथ शारीरिक विकास हो इसका भी पूरा ध्यान रखा जाता है.

‘ग्रामीणों और शिक्षकों की पहल से बना बेहतर स्कूल’

इस स्कूल के शिक्षक गिरिराज प्रसाद ने कहा कि आज के समय में शिक्षा जहां बहुत बड़ा व्यवसाय बन चुकी है. ऐसे में आदिवासी बहुल क्षेत्र में रहने वाले गरीब अपने बच्चों को निजी स्कूल की शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाते हैं. ऐसे में गरीब आदिवासी बच्चों के लिए इस सरकारी स्कूल के शिक्षकों और ग्रामीणों की पहल सराहनीय है.

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