अधिकारियों ने किया खरीद एजेंसियों के साथ मिलीभगत कर धान घोटाला

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चंडीगढ़। हरियाणा में इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) नेता और ऐलनाबाद से विधायक अभय सिंह चौटाला ने राज्य सरकार के अधिकारियों पर खरीद एजेंसियों के साथ मिलीभगत कर लगभग 40 हजार टन धान घोटाले को अंज़ाम देने का आरोप लगाया है। रियाणा में इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) नेता और ऐलनाबाद से विधायक अभय सिंह चौटाला ने राज्य सरकार के अधिकारियों पर खरीद एजेंसियों के साथ मिलीभगत कर लगभग 40 हजार टन धान घोटाले को अंज़ाम देने का आरोप लगाया है।

चाैटाला ने आज यहां जारी एक बयान में कहा कि प्रदेश में तीन बार चावल मिलों के स्टॉक की जांच के बाद लगभग चालीस हजार टन धान का स्टाक कम मिलना सीधे तौर पर यह दर्शाता है कि यह घोटाला सरकारी अधिकारियों ने कथित तौर पर खरीद एजेंसियों के साथ मिलीभगत कर किया जबकि राज्य सरकार बेवजह ही राइस मिलरों को परेशान कर रही है।

उन्होंने विधानसभा में भी मांग की थी कि इस घोटाले की जांच सीबीआई से या किसी निष्पक्ष जांच एजेंसी से कराई जाये ताकि पता लग सके कि नमी के नाम से किसानों से 150 से लेकर 200 रुपए प्रति क्विंटल जो कटौती की गई है वह राशि किसकी जेब में गई है। लेकिन सरकार ने इसकी जांच करने के बजाय राइस मिलरों की तीन-तीन बाद जांच कर बेवजह उन्हें परेशान किया।

उन्होंने दावा किया कि जिन खरीद एजेंसियों के अधिकारियों के विरुद्ध जांच करनी थी, उन्हीं को सरकार ने राइस मिलरों की जांच की जिम्मेदारी सौंप कर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अधिकारियों को बचाना चाहती है। उन्होंने कहा कि 28 दिसम्बर को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने जो सरकार को रिपोर्ट दी थी उसमें 12444 टन धान की कमी बताई गई थी। इसी तरह 2016 में भी नमी की आड़ में समर्थन मूल्य में से 100 से लेकर 200 रुपए तक की प्रति क्विंटल कटौती की गई थी जिसके बारे में इनेलो ने राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर जांच कराने की मांग की थी। विधानसभा में भी उन्होंने यह मुद्दा उठाया।

चौटाला ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि कृषि मंत्री जे.पी. दलाल ने 25 नवम्बर को बयान दिया था कि प्रदेश में कोई धान घोटाला नहीं हुआ और इस तरह के सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया था लेकिन अब सरकार स्वयं मान रही है कि राई मिलों की जांच में स्टॉक में 40 हजार टन धान कम पाया गया है। राज्य कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष धान की बिजाई 12 लाख हेक्टेयर में की गई थी और लगभग 42 लाख टन पैदावार का अनुमान था लेकिन हैरानी की बात है कि सरकारी खरीद एजेंसियों ने लगभग 70 लाख टन की खरीद दिखाई है।

इनेलो नेता ने आरोप लगाया कि सरकारी खरीद एजेंसियों के अधिकारियों ने व्यक्तिगत लाभ के लिए दूसरे प्रदेशों का धान खरीद कर राईस मिलों को मिलिंग के लिए दे दिया और धान खरीद करते समय कागजों में इसकी मात्रा ज्यादा दिखाई गई जबकि वास्तव में मंडियों में उतना धान मौके पर मौजूद नहीं था और ज्यादा दिखाए गए धान की अदायगी कराकर व्यापारियों के साथ मिलीभगत से सरकारी खजाने का दुरुपयोग किया गया।

इनेलो नेता ने सरकार से मांग की जो राशि किसानों से 150 से 200 रुपए प्रति क्विंटल काटी गई है वह किसकी जेब में गई है और कितना धान दूसरे प्रदेशों से लाकर यहां खरीदा गया और खरीद में धान की ज्यादा मात्रा दिखाकर सरकारी खजाने से कितनी राशि का किन-किन अधिकारियों ने दुरुपयोग किया है। उन्होंने सरकार से यह जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से करा कर सच्चाई सामने लाने की भी मांग की।

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