MP: पानी की चोरी रोकने के लिए यहां तैनात हैं सेना के जवान

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सागर: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सागर (Sagar) जिले में चितौरा डैम पर पानी को लेकर सेना के जवान और किसान आमने-सामने हैं. पानी को लेकर एक तरफ जहां जवान पहरा दे रहे हैं, तो वहीं किसानों को डैम के पानी का इस्तेमाल न करने की हिदायत दी गई है. सेना के एक दर्जन जवानों को तैनात किया गया है. जो 12 किलोमीटर लम्बी नदी और चितौरा एनीकट डैम पर पेट्रोलिंग कर रहे हैं. सेना के इस पहरे की वजह कैंट इलाके में गर्मियों के मौसम में होने वाला जलसंकट है.

दरअसल, सागर में सेना की छावनी है. इस छावनी को नगर पालिक निगम सागर बेबस नदी पर बनी राजघाट परियोजना से चितौरा डैम एनीकट पर पानी देता है. जिसके बाद यहां से सागर के कैंट इलाके में पानी की सप्लाई की जाती है. लेकिन, डैम के आसपास किसान खेती के लिए इसके पानी का इस्तेमाल करते हैं. जिसकी वजह से गर्मी के मौसम में खास कर मई और जून के महीने में कैंट इलाके में जलसंकट हो जाता है. वहीं इस जल संकट से बचने के लिए सेना अभी से सतर्क हो गयी है. और जो किसान सिंचाई के लिए मोटर लगाकर पानी का उपयोग करते हैं सेना द्वारा उन्हें रोक दिया जाता है. सेना के जवान किसानों की मोटर भी जब्त कर लेते हैं. जिसकी वजह से किसानों और सेना में तनाव भी होने लगा है.

सागर शहर से 10 किलोमीटर दूर चितौरा डेम पर सेना के जवानों हाथों में बंदूक लेकर पहरा दे रहे है. बेबस नदी पर बने राजघाट परियोजना से लेकर चितौरा डैम के 12 किलोमीटर लम्बी नदी से पानी लेने से रोक लगा दी है. और जो किसान इस स्टॉप डेम से पानी निकालते है. उनके मोटर, सेक्सन, कंडेशन, इलेक्ट्रिक तार वहां से जब्त कर लिए जाते हैं. इसके साथ ही सेना ने हिदायत दी है कि आगे से इस डेम के पानी का उपयोग ना करें. बताया जा रहा है कि राजघाट से सेना डेम की दूरी करीब 12 किलोमीटर है. और इस रास्ते में पड़ने वाले जितने भी गांव हैं उनके किसानों पर सिंचाई के लिए पानी पर प्रतिबंध लगा है.

किसानों का कहना है कि इसकी वजह से सिंचाई न होने से फसलें सूख रही हैं.
वहीं इस मामले पर नरयावली क्षेत्र के विधायक का कहना है कि वो इस मामले को लेकर प्रशासनिक तथा सेना के अधिकारियों से बात कर मामले का हल निकालने की कोशिश करेंगे.

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