मर्दानी 2 फिल्म रिव्यू- एक महत्वपूर्ण और तार्किक फिल्म

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निर्देशक- गोपी पुथरन

कलाकार- रानी मुखर्जी, विशाल जेठवा

“भारत में हर साल 18 साल से कम उम्र के लड़कों द्वारा 2000 से अधिक रेप क्राइम किये जाते हैं”

इस रिपोर्ट के साथ निर्देशक गोपी पुथरन ने फिल्म की शुरुआत से ही यह बता दिया है कि यह फिल्म क्यों और किस इरादे से बनाई गई है। साल 2014 में आई फिल्म ‘मर्दानी’ में शिवानी शिवाजी रॉय ने मुंबई में बाल तस्करी का मामला सुलझाया था। वहीं, अब वह एसपी बन चुकी हैं और कोटा में रेप की घटनाओं को रोकने की मजबूत इरादों के साथ काम कर रही हैं। बतौर सीक्वल फिल्म की शुरुआत प्रभावी है। पहले ही दृथ्य में लेखक- निर्देशक गोपी पुथरन ने सनकी किलर की क्रूरता स्थापित करने की कोशिश की है, जो सीन दर सीन और भी डरावना होता जाता है।

फिल्म की कहानी

शिवानी शिवाजी रॉय (रानी मुखर्जी) क्राइम ब्रांच अफसर से प्रमोशन पाकर अब एसपी बन चुकीं है और राजस्थान के कोटा में कार्यरत हैं। कोटा, जहां हर साल हजारों बच्चे इंजीनियरिंग, मेडिकल की तैयारी करने के लिए आते हैं, रेप की घटनाओं को लेकर खबरों में सुर्खियां बनाकर रहा है। दशहरे के दिन एक लड़की किडनैप होती है और दो दिनों के बाद नाले में मरी हुई पाई जाती है। उसके साथ बलात्कार हुआ है और बेहरमी से मार दी गई है। 18 से भी कम उम्र का यह बलात्कारी (विशाल जेठवा) बेहद शातिर और क्रूर है। ऐसे में एसपी शिवानी शिवाजी रॉय अपराधी तक कैसे पहुंचती हैं और इस बीच कैसी परिस्थितियां बनती हैं, यह काफी दिल दहलाने वाला है।

अभिनय

रानी मुखर्जी एक दमदार अदाकारा हैं और मर्दानी 2 के साथ वो एक बार फिर प्रभावशाली अंदाज में दर्शकों के सामने आई हैं। चालाक, चतुर, जांबाज अंदाज और मजबूत इरादों के साथ रानी मुखर्जी अपने चेहरे पर हर भाव बखूबी दिखा जाती हैं। रेप पीड़िता के साथ हुई बर्बरता का दर्द भी उनके चेहरे पर दिखता है। वहीं, एक्शन दृश्यों में भी वो सहानीय हैं। लेकिन रानी मुखर्जी के सामने जो दमदार टिके हैं, वो हैं विशाल जेठवा। चेहरे से मासूम दिखने वाले विशाल ने क्रूरता और सनकीपन को जिस तरह से दर्शाया है, वह जबरदस्त है। कहना गलत नहीं होगा कि कई दृश्यों में वो हावी रहे हैं। विशाल इससे पहले टेलीविजन में काम कर चुके हैं और मर्दानी 2 उनकी पहली फिल्म है। सह कलाकारों के तौर पर श्रुति बापना, विक्रम सिंह चौहान, दीपिका अमीन आदि ने अच्छा काम किया है।

निर्देशन

फिल्म की कहानी, पटकथा, संवाद और निर्देशन की जिम्मेदारी गोपी पुथरन के हाथों में थी और वो एक दमदार फिल्म देने में सफल भी रहे हैं। उनका निर्देशन काफी सधा हुआ सा है। फिल्म की तेज गति और विषय पर केंद्रित कहानी आपको बोर होने का मौका नहीं देती है। कुछ मौकों पर लिखावट कमज़ोर होती दिखी है, खासकर जहां क्रिमिनल को सामने देखकर भी पुलिस पहचान नहीं पाती। फिल्म के लगभग सभी पुरुष को महिला विरोधी दिखाने की कोशिश की गई है। जो थोड़ा चुभता है। फिल्म में महिला सुरक्षा के साथ साथ महिलाओं के प्रति समाज में फैले असमानता पर भी थोड़ी बात की गई है। क्लाईमैक्स तक जाते जाते फिल्म अलग ऊंचाई पर पहुंच जाती है। फिल्म का संदेश काफी स्पष्ट और दमदार है, जिसे आज समझने की बहुत जरूरत है।

तकनीकि पक्ष

बेहतरीन एडिटिंग के लिए मोनीषा बलदवा को जरूर तारीफ मिलनी चाहिए। फिल्म महज पौने दो घंटे में पूरी कहानी कह जाती है और यही तेज गति इसे और मजबूत बनाती है। फिल्म का फर्स्ट हॉफ जितना सधा हुआ सा है, सेकेंड हॉफ भी उतना ही आपको बांधे रखता है। कहानी में रुकावट लाने के लिए कोई गाने नहीं हैं और John Stewart Eduri द्वारा दिया गया बैकग्राउंड स्कोर भी बहुत सहज है।

देंखे या ना देंखे

कोई शक नहीं कि आज के वक्त में यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण और तार्किक फिल्म है। यह फिल्म समाज बदलने का वादा नहीं करती, लेकिन यदि कुछ लोगों भी सोचने पर मजबूर करती है, तो यह फिल्म की जीत है। ‘मर्दानी 2″ एक महिला को सचेत और प्रबल होने के साथ साथ कानून को भी मजबूत होने का संदेश देती है। फिल्मीबीट की ओर से फिल्म को 3 स्टार।

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