मकर संक्रांति : इन जगहों पर गंगा स्नान करने से मिलता है दोगुना पुण्य

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लखनऊ। मकर संक्रांति का त्योहर जल्द कुछ ही दिनों में आने वाला है। यह पर्व पर स्नान, दान और ध्यान के लिए जाना जाता है। इसी दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, जिसके कारण इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति के दिन श्रद्धालु गंगा सागर, वाराणसी, त्रिवेणी संगम, हरिद्वार, पुष्कर, उज्जैन की शिप्रा, लोहाग्रल आदि जगहों पर स्नान करते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि जो शख्स मकर संक्रांति के दिन गंगा में स्नान करता है। उसके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इस दिन गंगा में स्नान करने से दोगुना पुण्य मिलता है। मकर संक्रांति से पहले आइए जानते हैं वह कौन सी जगहें हैं? जहां पर गंगा स्नान करके कष्टों को दूर किया जा सकता है।

पश्चिम बंगाल में स्थित गंगा सागर में मकर संक्रांति के दिन स्नान करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि गंगा सागर में जो श्रद्धालु एक बार डुबकी लगाकर स्नान करता है। उसे 10 अश्वमेध यज्ञ और एक हज़ार गाय दान करने का फल मिलता है। इन्हीं कारणों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु मकर संक्रांति के दिन गंगा सागर में स्नान करने आते हैं। इस स्थान को गंगा सागर इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यहां पर गंगा का सागर में मिलन होता है।

हर साल मकर संक्रांति के दिन प्रयागराज में शाही स्नान का आयोजन किया जाता है। प्रयागराज में मकर संक्रांति के दिन स्नान करना इसलिए उत्तम माना गया है, क्योंकि यहां पर तीन नदियां यमुना, गंगा और सरस्वती का मिलन होता है।

काशी में गंगा स्नान का विशेष महत्व है। भारतीय सभ्यता में काशी को सबसे पुराने शहरों में गिना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जो इंसान जीवित काशी नहीं आता, मरने के बाद आता है। हर साल मकर संक्रांति के दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु काशी के गंगा घाटों पर डुबकी लगाते हैं। मकर संक्रांति के विशेष महत्व के कारण इस दिन काशी विश्वनाथ मंदिर में खिचड़ी महोत्सव मनाया जाता है।

हरिद्वार को हिंदू धर्म का सबसे पवित्र स्थल माना गया है। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन हरिद्वार में गंगा स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। हरिद्वार के स्नान को इसलिए खास माना गया है, क्योंकि यहीं से गंगा पहाड़ी क्षेत्रों से मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करती है। हर साल मकर संक्रांति के दिन हरिद्वार में खास मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें लाखों की संख्या में देश-विदेश के श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं।

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