IRCTC Indian Railways बोर्ड से 25 फीसदी अफसर बाहर, अभी और पर गिर सकती है गाज

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सरकार ने रेलवे बोर्ड के आकार में करीब 25 फीसदी की कमी की है। इसके अलावा मैन पावर के प्रभावी उपयोग के रूप में करीब 50 वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला कर उन्हें विभिन्न जोन में तैनात किया गया है। जानकारी के मुताबिक रेल भवन में रेलवे बोर्ड में कार्यरत कुल 200 डायरेक्टरों में से 50 को विभिन्न जोन शिफ्ट कर दिया। रेल मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि सोमवार (18 नवंबर, 2019) से इस बदलाव को लागू कर दिया गया।

जिन अधिकारियों का तबादला किया गया उनमें आईआरएसई और आईआरटीएस विभाग के दस-दस अफसर शामिल हैं। इसके अलावा आईआरएएस से सात, आईआरएसएमई से 6, आईआरएसईई से 5, आईआरएएसई से 5, आईआरएसएस से 3 आईआरपीएस 3 और आरपीएफ विभाग के एक अधिकारी का तबादला किया गया है।

उल्लेखनीय है कि रेलवे बोर्ड के कमर्चारियों की संख्या को कम करना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली 2.0 सरकार के शुरुआती 100 दिनों के एजेंडे का हिस्सा भी है। हालांकि रेलवे बोर्ड के आकार में कटौती करने की योजना पहली बार साल 2000 में दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में अमल में लाई गई थी। मगर नौकरशाही लॉबी के मजबूत विरोध के चलते में खासी देरी हुई थी।

इसी बीच मामले से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि सरकार ने जब पड़ताल की तो मालूम चला की निदेशक स्तर के अधिकारी समान काम कर रहे थे, इसलिए इनमें से कुछ अधिकारियों की फील्ड पोस्ट में तैनाती की गई। बता दें कि इससे पहले साल 2015 में बिबेक देबरॉय कमेटी ने भारतीय रेलवे बोर्ड में स्टाफ की संख्या कम करने की शिफारिश की थी। शिफारिश में कहा गया कि इसमें से अधिकतर अधिकारियों की पोस्टिंग फील्ड वर्क में की जानी चाहिए।

इसके अलावा हाल ही में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने विभिन्न बोर्ड के अधिकारियों के साथ मीटिंग में सुझाव दिया था कि बोर्ड में जरुरत से ज्यादा तैनात अधिकारियों को सक्रिय कामों में लगाया जाना चाहिए। बोर्ड के सदस्य पर अपनी राय देते हुए उन्होंने कहा कि कम से कम अधिकारियों को रेलवे बोर्ड में होना चाहिए।

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