जान बचानी है तो परवेज मुशर्रफ को भागना होगा लंदन, जानें क्यों

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पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को इस्लामाबाद की एक विशेष अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। उन पर देशद्रोह व आपातकाल लगाने का आरोप था। पेशावर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस वकार अहमद सेठ की अध्यक्षता में विशेष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने 76 वर्षीय मुशर्रफ को मौत की सजा सुनाई। वैसे वो अभी भी इस सजा के खिलाफ पाकिस्तान के शीर्ष कोर्ट में अपील कर सकते हैं। अगर वहां से भी उनकी फांसी की सजा बरकार रहती है तो उनकी जान एक ही सूरत में बच सकती है।

दरअसल पाकिस्तान के तानाशाह रह चुके पूर्व सैन्य प्रमुख परवेज मुशर्रफ मार्च 2016 में इलाज के लिए दुबई गए थे और सुरक्षा एवं सेहत का हवाला देकर तब से लौटे नहीं हैं। पाकिस्तान की स्पेशनल एंटी टेरेरिज्म कोर्ट (एटीसी) ने पिछले दिनों द फेडरल इनवेस्टिगेटिव एजेंसी (एफआईए) को मुशर्रफ की संपत्ति का पता लगाकर उसकी सूची देने को कहा था। एफआईए ने कोर्ट को जो सूची सौंपी है उसके मुताबिक मुशर्रफ के पास लंदन में एक फ्लैट है, जिसकी कीमत करीब 30 करोड़ है। मुशर्रफ पिछले दिनों इस फ्लैट को बेचना चाहते थे। लंदन के इस फ्लैट को उन्होंने 2009 में 13 लाख पाउंड नगद देकर खरीदा था।

परवेज मुशर्रफ अगर लंदन अपने घर चले जाते हैं तो वह फांसी से बच सकते हैं। यूके और पाकिस्तान के बीच जो प्रत्यर्पण संधि है उसके मुताबिक कोर्ट से सजा पाए किसी भी मुजरिम को यूके पाकिस्तान के हवाले तभी करेगा जब पाक सरकार यह सुनिश्चत करेगी कि उस मुजरिम को मौत की सजा नहीं दी जाएगी। जहां तक यूएई और पाकिस्तान के बीच प्रत्यर्पण संधि की बात है तो दोनों देशों में मौत की सजा पाने वाले मुजरिमों के बारे कोई स्पष्ट क्लॉज नहीं है।

जनरल परवेज मुशर्रफ ने अक्तूबर 1999 में सैन्य विद्रोह कर पाकिस्तान की सत्ता अपने हाथ में ले ली थी। जून 2001 में जनरल मुशर्रफ ने सैन्य प्रमुख रहते हुए स्वयं को राष्ट्रपति घोषित कर दिया था। अप्रैल 2002 में जनमत संग्रह करवाकर मुशर्रफ और 5 साल के लिए राष्ट्रपति बन गए। हालांकि यह जनमत संग्रह काफी विवादों में रहा।

2007 के अक्तूबर-नवंबर में मुशर्रफ ने फिर से राष्ट्रपति चुनाव जीता। मगर उनके चुनाव को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। इसके बाद उन्होंने देश में आपातकाल लागू कर दिया और मुख्य न्यायाधीश जस्टिस इफ़्तिख़ार चौधरी करी जगह एक नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त कर दिया जिसने उनके चुनाव पर मुहर लगा दी। 2008 के अगस्त में मुशर्रफ ने राष्ट्रपति पद से इस्तीफ़ा दे दिया।

27 मार्च 2013 को पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता एके डोगर ने मुशर्रफ के 3 नवंबर 2007 के आपातकाल थोपने को लेकर उनपर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाने की बात की।वहीं 5 अप्रैल 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका स्वीकार की। इसके तहत परवेज मुशर्रफ पर संविधान के अनुच्छेद 2 और 3 के तहत हाई ट्रीजन (पनिश्मेंट) एक्ट 1973 के तहत मुकदमा चलाने की बात की गई थी।

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